आशा से भरी तीन शामें
आशा बड़ी नायाब शक्ति है- आज से बेहतर करने कहने, सोचने, बनाने और बरतने की आशा ! आशा है तो लड़ते हैं, आशा है तो जीतते हैं,»
आशा बड़ी नायाब शक्ति है- आज से बेहतर करने कहने, सोचने, बनाने और बरतने की आशा ! आशा है तो लड़ते हैं, आशा है तो जीतते हैं,»
विपक्षी एकता कोई नई बात नहीं है। पहले विपक्षी एकता का आधार वैचारिक होता था अब यह स्वार्थ आधारित हो गया है। लेकिन»
ऐसा क्या है कि पूरी दुनिया गांधीजी में आज भी रुचि ले रही है? देश-दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उनके विचारों की»
मेरे लिए हर्ष का विषय है कि आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में बाबा विश्वनाथ की नगरी में पहली बार राजभाषा का सम्मेलन राजध»
इंडियन एक्सप्रेस के लिज मैथ्यू और घनश्याम तिवारी ने 10 अगस्त को अलग-अलग विषय पर लेख लिखा है। दोनों पत्रकारों को»
गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में एक राजनीतिक देवदूत थे। कांग्रेस से एक राजनीतिक देवदूत का जाना कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं»
अन्ना आंदोलन तक भ्रष्टाचार से मुक्ति के आंदोलनों की एक श्रृंखला है। अफसोस की बात है कि इन आंदोलनों से जो निकले उनमें कई»
जो हथकंडा इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने घोटाले की जांच से बचने के लिए अपनाया था, वही हथकंडा नेशनल हेराल्ड मामले में सोन»
संविधान सभा में ग्राम पंचायत पर हुई बहस को पढ़ने के बाद अनेक भ्रम दूर हो जाते हैं। उस बहस में करीब 50 सदस्यों ने भाग लिय»
जब संविधान की बात करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि संविधान बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसकी थी। संविधान सभा में स»
सेक्रेटरी आफ स्टेट एमरी ने 16 जून 1945 को हाउस आफ कामंस में कहाकि हमने भारत छोड़ने का निर्णय कर लिया है। इसके लिए हमें व»
कांग्रेस ने संविधान सभा के लिए अभियान चलाया। हर मंच से मांग की। 19 नवंबर 1939 को गांधी जी ने हरिजन में लिखा कि अगर वयस्क»
हमें यह जानना चाहिए कि संविधान की रचना का विचार कैसे पैदा हुआ और कब हुआ। कांग्रेस ने सबसे पहले मई 1934 में संविधान सभा क»
डा. राम मनोहर लोहिया कहते थे कि अंग्रेजों के बनाए प्रशासन तंत्र को हम जैसा का तैसा चला रहे हैं। 1909 में गांधी जी ने भी»
हिन्दू को एक पंथ तक सीमित करना और हिन्दुओं को बांटने की अंग्रेजों की चाल को हमारे महापुरूषों ने न समझा हो ऐसा नही है। अन»
अंग्रेजों ने अंग्रेजी शिक्षित वर्ग की सोच बदलने के लिए आर्य जाति के सिद्धांत का खूब उपयोग किया। सर हेनरी मेन का एक भाषण»
अंग्रेजों ने भारत की आजादी को केवल ‘सत्ता का हस्तांतरण कहा। यही हमें बताया और समझाया गया। बार बार दोहराया गया। अफसोस यह»
15 मार्च 1948 को रचनात्मक कार्यकर्ता सम्मेलन में कृपलानी का भाषण हुआ। कृपलानी अपने उस भाषण में पुराने विचार और तरीकों का»
आज से ठीक 47 साल पहले 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लागू करने की घोषणा की गई थी| यह आपातकाल पूरे देश में 21 महीने के ल»