योग महाऔषधि है
संभवत: ऐसा कोई भी व्यक्ति इस पृथ्वी पर अब नहीं मिलेगा जो योग से अपरिचित हो। इसका श्रेय किसी योगी या महायोगी को नहीं जाता»
संभवत: ऐसा कोई भी व्यक्ति इस पृथ्वी पर अब नहीं मिलेगा जो योग से अपरिचित हो। इसका श्रेय किसी योगी या महायोगी को नहीं जाता»
क्वाड नेताओं ने जापान में संपन्न सम्मेलन में एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया |यह बया»
भारत सरकार ने यूक्रेन में फँसे भारतीयों को वापस बुलाने के लिए समय समय पर कई एडवाइज़री जारी की हैं | वहाँ से छात्रों को भ»
वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय की पुस्तक ‘भारतीय संविधान-अनकही कहानी’ में नेहरू की तानाशाही रूख की कहानी भी दर»
हम अन्यत्र यह उल्लेख कर चुके हैं कि किस तरह भारत सरकार की गलत आयात नीति के कारण कृषि के क्षेत्र में उत्पादन तथा उत्पादको»
यह तो कहीं-कहीं छपा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि पटेल जयंती आयोजित करने वाला म»
कभी-कभी सरकारी निर्माण के लिए या सार्वजनिक संस्था के लिए किसान की जमीन ली जाती है। इस तरह अधिग्रहण की गयी जमीन का बाजार»
संयुक्त प्रांत के दौरे में प्रयाग के विद्यार्थियों की ओर से मुझे नीचे लिखा पत्र मिला थाःयद्यपि विद्यार्थियों की एक सभा म»
किसानों को सहायता देने के लिए निर्मित हुई कृषि उपज मंडियां उनके शोषण, उनके साथ धोखेबाजी तथा बेईमानी की मंडी बन रही है। र»
देहरादून से एक विद्यार्थी का हिन्दी में लिखा पत्र मिला है। उसका सार इस प्रकार हैःहमारे कालेज के छात्रावास में अब»
एक संवादाता ने मेरे पास कराची के एक विवाह समारोह के समाचार भेजे हैं। कहा गया है कि वहां एक धनवान सेठ श्री लालचंदज»
1947 में अंग्रेजों ने भारत की आजादी को केवल ‘सत्ता का हस्तांतरण कहा। अफसोस है कि भारतीय नेतृत्व ने भी यही माना, समझा और»
जब 1947 में हमने ब्रिटिश शासन को विदा करके अपनी स्वतंत्रता फिर स्थापित की थी तो अपने मन में यह सोच लिया था कि औपनिवेशिक»
भविष्य के प्रति आशा, सुन्दर सपनों की बुनियाद, आंखों में अटके वे आंसू, जिन्हें एकान्त नहीं मिला बह पाने को, घर परिवार की»
खैर उस समय हिंदुत्ववादी व्यक्ति संघ में थे और संघ के बाहर भी थे। और यह बड़े जोशीले थे। डा. जी के भाषण के बाद में हमारे पि»
दीनबंधु एंड्रयूज न केवल एक भले अंग्रेज हैं तथा उन्होंने इस देश के लिए न केवल अपना सर्वस्व निछावर किया है बल्कि वे एक कला»
अनादिकाल से भारत भूमि एवं भारतीय सभ्यता परमात्मा की विशिष्ट कृपा की पात्र रही है। यह राष्ट्र अनंत प्राकृतिक एवं सभ्यतागत»
स्वामी आनंद ने 7 अगस्त, 1927 के ‘नवजीवन’ में गुजरात भर के लोगों के वीरोचित कार्यों के बारे में जानकारी जुटाई है। उसमें प»
बड़े खेद का विषय है कि खादी प्रदर्शनी के आयोजन की आवश्यकता महसूस की गई। यह कदापि बधाई देने का विषय नहीं है, क्योंकि आम तौ»