लेखक के लेख

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यादों में अटल

आखिरकार, अटल जी ने 16 अगस्त (2018) को 5 बजकर 5 मिनट पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में यमराज को अपना पार्थिव शरीर ले जाने की अनुमति दे ही दी।…

जनसत्ता जो दुबारा जन्मा……

उन्ही दिनों इंदौर में 15-16 साल के प्रभाष जोशी गुजराती कॉलेज में फर्स्ट इयर विज्ञान के छात्र थे। वे याद करते हैं - नौकरी-करियर जैसी चीजों में कभी मन नहीं…

एमएसपी से न महंगाई बढ़ेगी, न सरकार पर बोझ

बड़ी मुद्दत के बाद भारत सरकार ने देश के किसानों को राहत देते हुए, उन्हें उनकी उपज के लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फैसला लिया है।…

जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

महात्मा  गांधी जन्मशताब्दी के साल भर चले समारोहों से प्रेरित  होकर देश उस रास्ते पर भले ही न चला हो, लेकिन उसकी एक उपलब्धि हिंदी पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही।  क्रांतिकारी…

वह तो काल परिवर्तन था

छत्रपति शिवाजी के उदय और मराठा राज्य की स्थापना ने भारत का राजनैतिक परिदृश्य बदल दिया था। अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक मराठों के शासन का विस्तार मुगलों से भी…

सेमेटिक विश्व और धार्मिक विश्व

अपनी चीन यात्रा पर जाने से पहले बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी में एशिया विश्व का…

यूरोप की राज्य केंद्रित व्यवस्था

उन्नीस सौ पचास के आसपास विश्व के अधिकांश देश यूरोपीय शक्तियों के औपनिवेशिक नियंत्रण से तो मुक्त हो गए, लेकिन उन पर यूरोप के आर्थिक-राजनैतिक विचारों और संस्थाओं का नियंत्रण…

विश्व व्यापार संगठन  और भारतीय कृषि

  164 सदस्य देशों वाले विश्व व्यापार संगठन का 11वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन अर्जेंटीना के ब्यूनेस आयर्स में 13 दिसंबर 2017 को संपन्न हुआ था |इस सम्मेलन के नतीजों का आकलन…

पंचायतें बने तीसरी सरकार

संविधान में 73वें संशोधन से पंचायत प्रणाली को नया कलेवर मिला। यह समझा गया कि इससे सत्ता गांव में पहुंच जाएगी। ऐसा अगर हो जाता तो भारत की प्राचीन पंचायत…

नेहरू और वाजपेयी का फर्क

हिन्दू अखबार से बातचीत में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ‘वाजपेयी जी सचमुच एक महान भारतीय और महान प्रधानमंत्री थे। भारत के बारे में जैसा विचार उनका…

पंचायतें सामाजिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र का स्वरूप

जय प्रकाश नारायण पंचायत राज प्रणाली सामाजिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र का एक स्वरूप है। यह आदर्श रूप में एक सुपरिभाषित सामाजिक एवं राजनीतिक दर्शन भी है। लेकिन सच यह है…