अर्थनीति
कोविड-19 के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था
प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है और अक्सर वांछित पाए जाते हैं, जबकि भुगतान किए गए बीमार अवकाश से सार्वभौमिक बुनियादी आय तक के लाभों को दूसरा रूप…
कोविड-19 का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
2000 के दशक से, भारत ने गरीबी को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। गरीबी का स्तर 2011 में 21.6 प्रतिशत से घटकर 2020 में 13.4 प्रतिशत होने का…
जलमार्ग बदलेंगे हिंदुस्तान की तकदीर
साल 2014 के आम चुनाव में जनता ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एनडीए के पक्ष में जनादेश दिया। यह जनादेश भारत को विकास की पटरी पर सरपट दौड़ाने…
धर्मपाल जन्मशताब्दी – स्वातंत्रयोत्तर भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा
1% लोगों ने देश को अपने चंगुल में जकड़ा हुआ है और 10% लोग उनके माया-जाल में जाने- अंजाने फंसे हुए हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा कि इनकी “सिविल लाइंस” अलग…
समय के साथ बदले सहकारिता के कायदे कानून
चौथी पंचवर्षीय योजना ने सहकारी समितियों के पुनर्गठन को प्राथमिकता दी। इसका उद्देश्य था अल्पकालीन और मध्यकालीन सहकारी संरचना को व्यवहारिक बनाना। इस पंचवर्षीय योजना का समय साल 1969 से…
ग्राम स्वराज्य के सपने को साकार करेगा, ‘एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम’
गांधी जी ग्राम स्वराज्य की बात करते थे। लेकिन नीति नियंताओंं ने गांधी के गांव को भुला दिया था। योगी सरकार की एक जनपद एक उत्पाद योजना इस सपने को…
हरित क्रांति के सबक
ब्रिटिश हूकूमत से पहले भारत में खेती भारतीय जीवन शैली का परंपरागत अंग था।पशुपालन भी खेती किसानी का हिस्सा था। खेती स्वतंत्र एवं जीवन-निर्वाहक प्रकृति की थी। किसान स्वतंत्र थे,…
स्वतंत्र भारत में सहकारिता आंदोलन
साल 1946 में सरदार बल्लभ भाई पटेल की अपील पर खेड़ा के दुग्ध उत्पादक 15 दिन की हड़ताल पर चले गए। यह आंदोलन निजी पोलसन कंपनी को दूध खरीदने के…
सफर सहकारिता का
भारत की अर्थव्यस्था कृषि अर्थव्यवस्था रही है। ग्राम स्वराज्य उसी खेती किसानी पर आधारित है। भारत में किसान का स्वभाव सहकार रहा। किसान की हरएक व्यवस्था एक दूसरे के सहयोग…
कोरोना से कराहता चीन और सुनहरे भविष्य की ओर भारत
विश्व विरादरी में चीन घिरता जा रहा है। उसके अपने कारनामें धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं। जिस कोरोना से पूरी दुनिया परेशान है उसे चीन की चाल समझी जा रही…
अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के वित्तीय इतिहास में शायद पहली बार दो विकल्पों वाली टैक्स व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है| यानी करदाता चाहें तो पिछले वित्तीय वर्ष के…











