विषय संग्रह

लोक चर्चा

समरसता का बोध कराता कुंभ

भी हम परिवार, समाज, राष्ट्र,जाति एवं संसार के रूप में मिलकर अमृतकलश की प्राप्ति के लिए परम व्यग्र हैं।धार्मिक अवमूल्यन को रोकने एवं नई दिशा देने हेतु हिंदू धर्म में…

‘अर्जन’ से ‘विसर्जन’ तक की यात्रा का पड़ाव है कुंभ

‘संभावनाओं’ के गहरे समुद्र का मंथन करता है। इस मंथन से जो रत्न पाते हैं, उनमें धन की प्राप्ति (लक्ष्मी), धन प्राप्ति के उपरान्त आने वाले कुटैव और मद (सुरा),…

तीर्थराज प्रयाग का पौराणिक महत्व

ब्रह्मवैवर्त पुराण एवं कई महान शासकों की गाथाओं में मिलता है। पद्म पुराण की कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण के बाद गंगा तट पर सृष्टि का प्रथम…

राष्ट्र निर्माण में अखाड़ों, आश्रमों और धार्मिक केंद्रों की भूमिका

समाज को उग्र व हिंसक सांप्रदायिक विरोध से जूझना पड़ा। फिर वनवासी समाज को दशनामी से जोड़ा गया, जिससे उग्र विरोध का सामना न हो। इन्हीं शस्त्रधारी वनवासियों की जमात…

संत परंपरा और अखाड़े

और भारत के ऋषियों ने अपनी ज्ञान साधना से पूरे समाज को आलोकित किया है। संतों ने अपनी तपस्या से भारत की धरा को पवित्र रखा है। जहां जाने की…

कुंभ की शोभा हैं अखाड़े

बनने की प्रक्रिया भी बड़ी जटिल है। दीक्षा लेने से पहले उन्हें खुद का पिंडदान और श्राद्ध तर्पण तक करना पड़ता है। कोई व्यक्ति जब संन्यासी बनने के लिए किसी…

बंधन से मुक्ति दिलाता है गंगा स्नान

कुंभ की उत्पत्ति एवं इसके योगों के विषय में मान्यता है कि जब दैवीय व आसुरी प्रवृत्तियों का युद्ध हो रहा था, तब किसी प्रकार दोनों का समन्वय कराने के…

कुंभ पर्व की कथा और उसके प्रकार

हैं। पृथ्‍वी पर जो स्‍थान हैं उनमें प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन व नासिक हैं। इसीलिए इन चारों स्थानों पर प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात महाकुंभ का मेला आयोजित किया जाता है।…

महाकुंभ की दिव्य और भव्य तैयारी

सरकार की योजना है। पर्यटन विभाग देश-विदेश से आने वाले लोगों को घर जैसा माहौल और खानपान उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय लोगों को अपने मकानों का पेइंग गेस्ट के…

मोहन भागवत का संदेश – भारतीयता अपनाएं

हर समय का एक युगधर्म होता है। आज का युगधर्म क्या है? राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत सतत अपने व्याख्यानों में यही तो देशवासियों को समझा रहे हैं।…