लेखक के लेख
के. विक्रम राव
दास्तां एक अभिषप्त हीरे की !
ब्रह्मपुत्र पर इतिहास रचा गया ! चीन जरूर व्यथित रहा होगा !!
हिटलरी कमांडर कांपते थे उस यहूदी सार्जेंट के टाइपराइटर से !!
माफिया कि मौत !अंत भला तो सब भला !!
अरुणाचल अब शोकांतिका नही रहा ! अलबत्ता तिब्बत तो त्रासदी है !!
कब प्रौढ़ होंगे हमारे मीडियाकर्मी ? बलूच बागी को अपना बिरादर मानें !!
फर्जी इतिहास पढ़ाना देशद्रोह है !
यूरोपीय संसद में चली घूस ! कतर में श्रमिक-शोषण दबा दिया !!
सर्कसी शेर की अब धुंधली याद ही है ! न भालू रहा, न हाथी, बस घोड़ा बचा !
कब तक दौड़ सकेंगे घोड़े मुंबई के विवादित महालक्ष्मी रेसकोर्स पर ?
चीन से बाघ को बचाना है ! इंदिरा ने पाला था, मोदी ने पोसा है !!











