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राजनीति का जातिवादी संकट

 दक्षिण की तरफ महार जाति से सम्बंधित डॉ. आंबेडकर के दलितों के मसीहा के रूप में स्थापना के समानांतर एवं बराबर प्रतिरोध के लिए कांग्रेस ने उत्तर भारत में चमार…

कांग्रेस के पेट में असहनीय दर्द क्यों उठा है?

  लोकसभा का यह आम चुनाव भविष्योन्मुखी है। कैसे और क्यों? यही जानने का विषय है। इससे पहले के ज्यादातर चुनाव अतीत की उलझनों पर केंद्रित होते थे। सिर्फ एक…

धार्मिक आरक्षण जैसे गैरजरूरी मुद्दे पर कौआ-रार

देश में धार्मिक आधार पर आरक्षण को लेकर शुरू से ही बहस होती रही है। लोकसभा या विधानसभा चुनावों के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष द्वारा धार्मिक आरक्षण के मसले को…

रामलला का सूर्य तिलक

हेमंत शर्मा ने अपनी पुस्‍तक ‘राम फिर लौटे’ के जरिये रामतत्व, रामत्व और पुरुषोत्तम स्वरूप की विराटता से लोगों को परिचित कराया है। यह पुस्तक ‘मंदिर किन भारतीय मूल्यों का…

सरकार का एक ही धर्मग्रंथ है ‘भारत का संविधान’ – नरेन्द्र मोदी

तमिलनाडु की सभाओं में उन्होंने बताया कि सुब्रमण्यम भारती की कविताओं में भारत को माता स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। हिन्दू धर्म में शक्ति का स्वरूप है, मातृ शक्ति, नारी…

मोदी सरकार की संवैधानिक यात्रा का वर्णन करती पुस्तक ‘CONSTITUTION JOURNEY AN OVERVIEW FROM 2014-2024’

इसलिए नहीं बनाया होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा को ऊंचा स्थान देने का उनका स्वभाव है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने संसद से विधिवत और सर्वसम्मत पारित कानून को नकार…

अपनो पर नहीं बाहरियों पर है भाजपा को भरोसा

लोकसभा चुनाव - 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी समेत अनेक क्षेत्रीय दलों से आए नेताओं को दिल खोलकर उम्मीदवार बनाया है। जितिन…

कम्युनिस्ट कुचक्र में कांग्रेस

विगत एक - डेढ़ दशकों से देश की सबसे पुरानी पार्टी का शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व वामपंथ के मोह में जकड़ा हुआ है। राहुल गांधी और प्रियंका वढेरा वामपंथी विचारधारा के…

लोकतांत्रिक पर्व के विविध रंग, हारने के लिए भी लड़ते हैं जंग

भारत में चुनाव को लोकतंत्र के महापर्व के तौर पर देखा जाता है। यहां पर चुनावों के दौरान विविध पृष्ठभूमि के उम्मीदवार चुनाव मैदान में होते हैं। चुनावी रंग भी…