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प्रभाष प्रसंग में ‘विनोबा-दर्शन’

उसी रिपोर्टिंग से यह किताब ‘विनोबा-दर्शन’ बनी है। आठवें प्रभाष प्रसंग पर ‘लोक का प्रभाष’ शीर्षक से प्रभाष जी जीवनी का लोकार्पण हुआ था। जिन दिनों रामाशंकर कुशवाहा जीवनी पर…

ये पत्रकारिता की दुर्गति है

पिछले दिनों एक चर्चित हिंदी समाचार चैनल की महिला उद्घोषिका का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे स्टूडियो में छाता लेकर एंकरिंग कर रही हैं. पीछे विशालकाय स्क्रीन पर…

आपातकाल: ज़ब संविधान की प्रस्तावना अपमानित हुई

संविधान, जिसे भारत में धर्म ग्रन्थ सरिखा सम्मान प्राप्त है, के इतिहास में कई महत्वपूर्ण तिथियां अंकित हैं. ऐसी ही एक तिथि 25-26 जून की है ज़ब देश में आपातकाल…

आपातकाल एवं संपूर्ण क्रांति: इतिहास से सबक

कार्ल आर. पापर ने अपने लेख 'द पावर्टी ऑफ हिस्टारिसीज्म' में लिखा है, इतिहास का कोई अर्थ नहीं होता, क्योंकि इतिहास का कोई लक्ष्य नहीं है. पापर के इस कथन…