लेखक के लेख

प्रज्ञा संस्थान

बुद्धि बनाम श्रद्धा

एक पत्र-लेखक ने मुझे ‘प्रबुद्ध भारत’ का सितंबर का अंक भेजा है। इस अंक में संपादक ने मेरे उस उत्तर का प्रतिवाद प्रकाशित किया है, जो मैंने हाल ही में…

मौलिक व्यक्तित्व के नेता थे कल्याण सिंह

कल्याण सिंह एक मौलिक व्यक्तित्व के  नेता थे।वे किसी की नकल नहीं करते थे। उनका अपना सब कुछ मौलिक था। चिंतन ,भाषण ,लेखन यहां तक कि कपड़े भी अपने तरीके…

संसदीय इतिहास में दर्ज है कल्याण सिंह और रोमेश भंडारी की बहस

बात है 17 अक्टूबर 1996 की। यह वही दिन था जिस दिन उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा। विधान सभा को निलंबित रखा गया। राज्यपाल था रोमेश भंडारी। जबकि राजभवन…

“गांव उठेगा, देश उठेगा” कवि कल्याण सिंह

अपनी सघन और गहरी अनुभूतियों को कल्याण सिंह बिना कीसी शास्त्र या अनुशासन का पालन किये शब्द देते हैं। कतार के आखिरी आदमी की पीड़ा उनकी कविता के आशय में…