लेखक के लेख

कृष्ण प्रभाकर उपाध्याय

‘अर्जन’ से ‘विसर्जन’ तक की यात्रा का पड़ाव है कुंभ

‘संभावनाओं’ के गहरे समुद्र का मंथन करता है। इस मंथन से जो रत्न पाते हैं, उनमें धन की प्राप्ति (लक्ष्मी), धन प्राप्ति के उपरान्त आने वाले कुटैव और मद (सुरा),…