लेखक के लेख

मनोज मोहन

तेजी से बदलता हिंदी का संसार

वह विलुप्त होती हुई परंपरा है। इसलिए हाल ही में प्रकाशित उनकी किताब 'आहोपुरुषिका' पर मृदुला गर्ग के ब्लर्ब का एक अंश देने के लोभ से अपने को बचाना मुश्किल…