महिला आईपीएल – समानता के मोर्चे पर सुखद शुरुआत

हाल ही खत्म हुए पहले महिला आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने दिल्ली कैपिटल्स को हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली |कहना  गलत नहीं होगा कि  इस आयोजन में एक टीम की जीत में ही सभी महिला  खिलाड़ियों  की विजय का संदेश समाहित है  |  दरअसल, क्रिकेट के खेल के मैदान में हुई यह नई शुरुआत  बेटियों के लिए समानता के मोर्चे पर एक नई पिच तैयार करती  है | अपनी क्षमता को साबित करने का अवसर देती है | भारतीय खेलों की दुनिया में  विमेंस प्रीमियर लीग एक  ऐसा ऐतिहासिक कदम है जो महिला खिलाड़ियों के लिए दूसरे खेलों में भी बेहतरी की राह खोलने  वाला साबित होगी | यही वजह है कि  डब्ल्यूपीएल को लैंगिक समानता की पिच पर भी एक बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है |  यह महिला क्रिकेट को देखने के मोर्चे पर ही नहीं युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के मामले में भी अहम साबित होगा | अब तक एक ही मैदान में एक ही खेल को खेलने के बावजूद महिला क्रिकेट को लेकर लोगों में इतना उत्साह नहीं देखा गया, जितना की पुरुषों के खेल को लेकर रहा है | नतीजतन, महिला  क्रिकेट खिलाड़ी कमाई से लेकर लोकप्रियता हासिल करने तक जरा पीछे ही रहीं | निश्चित रूप से अब परिस्थितियाँ हर मामले में बादल जाएंगी |

दरअसल, खेल बराबरी का सबसे बड़ा पैमाना होते हैं |  मैदान में उतरने के बाद अपना माद्दा और मनोबल ही सबसे अहम होता है | हालिया बरसों में महिला क्रिकेटर्स ने भी अपनी उपस्थिति को पुख्ता किया है | महिला क्रिकेटर  अपने खेल का दमखम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैदानों जमकर दिखा रही हैं |  नतीजतन, कभी पुरुषों का खेल माने जाने वाले  क्रिकेट में भी आमजन की भी रुचि जगी है | महिला क्रिकेटरों के प्रदर्शन और  जीत दर्ज करने के जज़्बे को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है | इसका अंदाजा इस बात लगाया जा सकता है कि वायकॉम 18 ने डिजनी स्टार और सोनी को पछाड़कर  हाल ही समाप्त हुए महिला आईपीएल के मीडिया अधिकार पांच साल के लिये 951 करोड़ रुपये में खरीद लिए  हैं | आगामी पांच वर्षों तक प्रति मैच  7करोड़ 90 हजार रुपये फीस चुकाना महिला क्रिकेट के लिए वाकई एक ऐतिहासिक शुरुआत है | मानदेय एक मामले में देखें तो विमेन्स  प्रीमियर लीग 2023 को जीतने वाली टीम को 6 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा |  वहीं, फाइनल मैच में हारने वाली यानी रनर-अप टीम को 3 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी | 

गौरतलब है कि 2017 में आईसीसी महिला विश्व कप के फाइनल में  भारतीय टीम के पहुंचने के बाद से ही  महिला क्रिकेट  को गंभीरता से लिया जाने लगा था | इतना ही नहीं अपने बेहतरीन प्रदर्शन को कायम रखते हुए  हमारी महिला  टीम 2020 में  टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची थी।  कुछ समय पहले ही भारतीय टीम ने अंडर-19 महिला टी-20 वर्ल्ड कप में  शानदार हासिल करते हुए पहला आईसीसी खिताब जीता था |  आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दुनिया सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है | ऐसे में विमेंस  प्रीमियर लीग  से अगली पीढ़ी की महिलाओं  क्रिकेट को पेशेवर रूप  खेलने का विकल्प मिल सकेगा |  
 
 निस्संदेह,आज के समय में खेल को भी रुचि ही नहीं बल्कि करियर की तरह देखा जाना जरूरी है |   सुखद है कि लीग के पहले संस्करण में भी नीलामी के लिए कुल 1,525 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था |  साथ ही  महिला क्रिकेटर्स  को अपनी टीम का हिस्सा बनाने के लिए खूब उत्साह देखा गया | गौरतलब है कि क्रिकेट के खेल में पुरुष आईपीएल की तरह  महिलाओं के लिए बनी इस लीग  में पांच फ्रेंचाइजी ने 87 खिलाड़ियों को खरीदकर अपनी टीम बनाई थी । ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि चयन और मानदेय से जुड़ी ऐसी हर शुरुआत एक सामाजिक संदेश भी देती है |  हमारे यहाँ बीसीसीआई से अनुबंधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को पुरुषों के बराबर मैच फीस मिलने का निर्णय भी कुछ समय पहले ही आया है  |  बोर्ड से अनुबंधित महिला क्रिकेटर के लिए समान वेतन की पॉलिसी लागू  होना भी ना केवल कमाई बल्कि मनोबल  को  बढ़ाने वाला निर्णय  भी था | भारतीय क्रिकेट बोर्ड का यह फैसला महिला समानता से लेकर खेलों की दुनिया में बेटियों की भागीदारी बढ़ाने और अपनी काबिलीयत का लोहा मनवाने का माद्दा जगाने तक, हर पहलू पर जरूरी था | उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई नई व्यवस्था के तहत महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को समान वेतन देने वाला दुनिया का दूसरा बोर्ड है |   

सुखद है कि इस आयोजन से  विमेंस प्रीमियर लीग की महिला खिलाड़ियों के लिए  मैच फीस के मामले में ही नहीं दूसरे मोर्चों पर भी    आर्थिक रूप से भी बेहतरी की राहें खुलेंगी |  उनकी लोकप्रियता बढ़ेगी | पुरुष खिलाड़ियों की तरह ही  कई कंपनियों के अनुबंध उनके भी हिस्से आएंगे | देश-दुनिया में उनके खेल की चर्चा होगी |  निस्संदेह, आज के व्यावसायिक दौर में डब्ल्यूपीएल महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए  बहुत से सुखद बदलावों की नींव बनेगा |

[लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं]

डॉ. मोनिका शर्मा

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