लेखक के लेख
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प्रभाष प्रसंग में ‘विनोबा-दर्शन’
उसी रिपोर्टिंग से यह किताब ‘विनोबा-दर्शन’ बनी है। आठवें प्रभाष प्रसंग पर ‘लोक का प्रभाष’ शीर्षक से प्रभाष जी जीवनी का लोकार्पण हुआ था। जिन दिनों रामाशंकर कुशवाहा जीवनी पर…
हेय हब्शी वे कभी कहलाते थे ! आज उनकी बोली स्वाहिली संयुक्त राष्ट्र की मान्य भाषा है.
काफिर को मारो, 72 हूरें पाओ ! फिल्म JNU में दिखाई गई !!
नस्लवाद पर फ्रांस में विद्रोह ! प्रधानमंत्री की यात्रा अधर में !!
ये पत्रकारिता की दुर्गति है
पिछले दिनों एक चर्चित हिंदी समाचार चैनल की महिला उद्घोषिका का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वे स्टूडियो में छाता लेकर एंकरिंग कर रही हैं. पीछे विशालकाय स्क्रीन पर…
आज बर्थडे है पोस्टकार्ड का !
आपातकाल: ज़ब संविधान की प्रस्तावना अपमानित हुई
संविधान, जिसे भारत में धर्म ग्रन्थ सरिखा सम्मान प्राप्त है, के इतिहास में कई महत्वपूर्ण तिथियां अंकित हैं. ऐसी ही एक तिथि 25-26 जून की है ज़ब देश में आपातकाल…
आदत भीतरघाती, मगर सपने मुंगेरीलाली ! शिमला तक रुकें !!
गाँधी विद्या संस्थान में मनाया गया आपातकाल दिवस*
पाक फुटबॉल टीम धुप्पल में भारत से हारी ! दुबारा मैच हो !!
आपातकाल एवं संपूर्ण क्रांति: इतिहास से सबक
कार्ल आर. पापर ने अपने लेख 'द पावर्टी ऑफ हिस्टारिसीज्म' में लिखा है, इतिहास का कोई अर्थ नहीं होता, क्योंकि इतिहास का कोई लक्ष्य नहीं है. पापर के इस कथन…











