हल की लकीरों से लिया सभ्यता ने आकार
मनुष्य ने जब खेती करना सीखा होगा तभी वह स्थाई जीवन जीना भी सीखा होगा। हल की लकीरों से ही सभ्याताओं ने भी आकार लिया होगा। भारत इसमें हमेशा आगे…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
मनुष्य ने जब खेती करना सीखा होगा तभी वह स्थाई जीवन जीना भी सीखा होगा। हल की लकीरों से ही सभ्याताओं ने भी आकार लिया होगा। भारत इसमें हमेशा आगे…
विश्व में कोरोना वायरस का संक्रमण चीन से हुआ है। लेकिन उसका सबसे घातक प्रभाव अमेरिका और यूरोप के सबसे समृद्ध देशों पर पड़ा है। अप्रैल के तीसरे सप्ताह के…
प्रो. एम.एन. दास को जिन्ना और विंसटन चर्चिल के पत्रों में एक रहस्यमय पत्र मिला। चर्चिल ने जिन्ना को लिखा था कि वह उन्हें मिस इ.ए.गिलिपिट के नाम से पत्र…
'कोरोना के बाद राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना' विषय पर मनीषी राम बहादुर राय का व्याख्यान दिनाँक 04/02/2020
आबोहवा में उदासी घुली है। बेदर्द वक्त की ध्वनियों में असहायता के स्वर है। ह्दय में अकेलेपन के दर्द की उठती लहरियां है। सब कुछ अनहोनी खामोश लहरिया है। नि:शब्द…
आफत के काल में सांसत के रेले है। फिर भी दम-ब-दम बेदम होने के बाद भी दम शरीर में बना हुआ है। कोरोना के पूर्व प्राण पखेरू के उड़ान का…
मज़दूरों के व्यथा की गवाह बनी सड़कें। उनके दुख - दर्द से भरे दारुण कथा को बयाँ कर रही थी। हाड़ तोड़ खटने के बाद भी ‘ एक चिथड़ा सुख…
भारत में किसान आंदोलनों का इतिहास गौरवशाली रहा है। ऐसे आंदोलनों में अवध किसान आंदोलन सबसे अहम माना जाता है। सौ साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रुरे गांव…
सामाजिक राजनैतिक जीवन के हर व्यक्ति पर बहस होनी चाहिए, यह जरूरी है। क्युकी उससे देश प्रभावित होता है। कोई अपवाद नहीं हो सकता है। अर्णव हम आपके शुक्रगुजार है…
यह महासंकट का समय है। ऐसे समय में मनोवृति कैसे बदल जाती है इसे यह घटना बताती है एक सौ चैदह साल पुरानी बात है। महात्मा गांधी आचार्य जे.बी. कृपलानी…
कोरोना के बाद कला-संस्कृति की भूमिका पर मनीषी राम बहादुर राय जी का व्यख्यान|
साल 1946 में सरदार बल्लभ भाई पटेल की अपील पर खेड़ा के दुग्ध उत्पादक 15 दिन की हड़ताल पर चले गए। यह आंदोलन निजी पोलसन कंपनी को दूध खरीदने के…