जिन्ना की तिकड़म
संविधान सभा ने अपने लिए जो उद्देश्य निर्धारित किए, क्या उसे वह प्राप्त कर सकी? अत्यंत पीड़ादायक तथ्य है कि संविधान सभा को अपने उद्देश्य परिवर्तित करने पड़े। ऐसा क्यों…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
संविधान सभा ने अपने लिए जो उद्देश्य निर्धारित किए, क्या उसे वह प्राप्त कर सकी? अत्यंत पीड़ादायक तथ्य है कि संविधान सभा को अपने उद्देश्य परिवर्तित करने पड़े। ऐसा क्यों…
मुझे हिन्दू होने पर गर्व है क्योंकि मेरा धर्म किसी पर थूक फेंक कर उसे कोरोना-संक्रमित करने की अनुमति नहीं देता चाहे वह व्यक्ति मेरा खुला दुश्मन ही क्यों न…
मिर्जा गालिब ने कहा था, ‘‘वो अपनी खू न छोड़ेंगे, हम अपनी वज’अ क्यों छोड़ें…’’। सचमुच, जब दुनिया अभूतपूर्व रोग से लड़ रही है, और रोजाना हर कोने में…
पहले मौसम की मार और अब कोरोना त्रासदी। हम कहीं के नहीं रहे। यह कहना है आम के बागवानों और कारोबारियों का। दोनों को गर्मी के मौसम का इंतजार रहता…
कोरोना के कहर से देश ठप है। कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। खेती किसानी तथा कृषि पर आधारित अन्य गतिविधियों में लगे लोगों के…
विश्व विरादरी में चीन घिरता जा रहा है। उसके अपने कारनामें धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं। जिस कोरोना से पूरी दुनिया परेशान है उसे चीन की चाल समझी जा रही…
इम्तियाज अहमद की फेसबुक वाल से.. न्यायिक प्रणाली की स्थापना मिथक पर की जाती है कि न्यायाधीश कानून और योग्यता के आधार पर मामलों का निर्णय लेते हैं । सुप्रीम…
हमरे बगिया में रंग-रंग के आम, महुआ, जामुन, कटहर, बडहड, इमली, कैथा, बईर, जंगल जलेबी, ढेरा, सिंहोर, बांस, चिलबिल अउर बेल आदि के पेड अहइ। अइसन हलब्बी और गुणी पेड…
जब नंदलाल बसु को हमारे संविधान की मूल प्रति के चित्रांकन का काम सौंपा गया था तो वह कोई सरकारी या अर्ध-सरकारी प्रस्ताव तो नहीं रहा होगा। जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन…
आनंद कुमार कांग्रेस समाजवादी दल के महासचिव जयप्रकाश नारायण के अनुसार, ‘संविधान ब्रिटिश शासन की उपज है। इसलिए यह हमें वैसी आजादी कभी नहीं दे सकता, जिसके लिए हम संघर्ष…
भारत में ब्रिटिश शासन आने से पहले, खेती भारती जीवन-शैली का परंपरागत अभिन्न अंग थी। पशुपालन भी खेती किसानी का हिस्सा था। खेती स्वतंत्र एवं जीवन-निर्वाहक प्रकृति की थी। किसान…
दूसरे अध्याय में जीवन के तीन महासिद्धांत प्रस्तुत किए गए है- पहला आत्मा की अमरता और अखंडता। दूसरा देह की क्षुद्रता। तीसरा स्वधर्म की अबाध्यता। इनमें स्वधर्म का सिधांत कर्तव्य…