हल की लकीरों से लिया सभ्यता ने आकार
मनुष्य ने जब खेती करना सीखा होगा तभी वह स्थाई जीवन जीना भी सीखा होगा। हल की लकीरों से ही सभ्याताओं ने भी आकार लिया होगा। भारत इसमें हमेशा आगे…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
मनुष्य ने जब खेती करना सीखा होगा तभी वह स्थाई जीवन जीना भी सीखा होगा। हल की लकीरों से ही सभ्याताओं ने भी आकार लिया होगा। भारत इसमें हमेशा आगे…
भारत में किसान आंदोलनों का इतिहास गौरवशाली रहा है। ऐसे आंदोलनों में अवध किसान आंदोलन सबसे अहम माना जाता है। सौ साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रुरे गांव…
कोरोना महामारी बाजारपरस्त वैश्वीकरण का नया संस्करण है या उसका अंत? यह विमर्श का मुद्दा हो सकता है, लेकिन एक बात स्पष्ट हो गई है कि ग्राम गणराज्य में…
वसंधुरा - जैसा कि नाम से वर्णित है-वसु जिसमें वास है! यह पंच भौतिक तत्व-मिट्टी, जल, आकाश, वायु एवं अग्नि से मिलकर बनी है! आधुनिकीकरण-भौतिकतावाद के भूलभुलैया में फंसकर हमने…
भारत कृषि प्रधान गांवों का देश है और गांव का इतिहास मानव सभ्यता के विकास का इतिहास रहा है। गांव परिवारों या व्यक्तियों का समूह मात्र नहीं है। विभिन्न ऐतिहासिक…
पहले मौसम की मार और अब कोरोना त्रासदी। हम कहीं के नहीं रहे। यह कहना है आम के बागवानों और कारोबारियों का। दोनों को गर्मी के मौसम का इंतजार रहता…
कोरोना के कहर से देश ठप है। कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। खेती किसानी तथा कृषि पर आधारित अन्य गतिविधियों में लगे लोगों के…
भारत में ब्रिटिश शासन आने से पहले, खेती भारती जीवन-शैली का परंपरागत अभिन्न अंग थी। पशुपालन भी खेती किसानी का हिस्सा था। खेती स्वतंत्र एवं जीवन-निर्वाहक प्रकृति की थी। किसान…
भारत में हरित क्रांन्ति की शुरुआत सन 1966-67 से हुई। इसकी शुरूआत का श्रेय नोबल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर नारमन बोरलॉग को जाता है। हरित क्रांन्ति का उद्देश्य अन्न उत्पादन को…
कोरोना के कहर से हर कोई अपने घरों में हैं। वो लोग जो महानगरों की चमक दमक से प्रभावित होकर गांव छोड़ गए थे वे वापस आ रहे हैं। यह…
आज आजादी के 75 साल पूरा करने को दो साल बचे हैं। प्रकृति ने हमें सोचने का एक अवसर दिया है। हम सोचें उन मजदूरों की आंख में आंख डालकर…
आजादी के बाद जमींदारी प्रथा का अंत हो चुका है। इसके बाद किसानों को जमीन का हक मिला। लेकिन यह हक काफी कुछ पन्नो पर ही है। उद्देश्य से काफी…