विषय संग्रह

पड़ताल

नगालैंड के गांधी

  नगालैंड के गांधी नटवर ठक्कर नहीं रहे। गुवाहाटी के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वे उस पीढ़ी के थे जो भारत की एकता और अखंडता के लिए…

कब खड़ा होगा हमारा अपना रक्षा उद्दोग

  पिछले सात दशक से अपनी रक्षा चुनौतियों को हम कितनी अगंभीरता से ले रहे हैं, इसका सबूत सभी तरह की रक्षा सामग्री के लिए हमारा विदेशों पर निर्भर रहना…

खाप पंचायतें पंचायती व्यवस्था का शक्तिशाली स्वरूप हैं

खाप पंचायतों को लेकर कुछ सालों में एक गलत धारणा बन गई है। खाप पंचायतों को कबीलाई दृष्टि से देखा जाने लगा। लेकिन खाप पंचायतें इस देश की सामाजिक व्यवस्था…

सोनियां गांधी ने क्यों बंद करवाई तहलका टेप की जांच?

सोनिया गांधी ने तहलका टेप की जांच क्यों बंद करवाई? उनका फर्स्ट ग्लौबल कंपनी से क्या रिस्ता है? क्योंकि बिना रिस्ते और रूचि के कोई किसी जांच को क्यों रूकवाएगा। फर्स्ट…

अब तक वे संघ के मार्गदर्शक थे, अब देश के अभिभावक हो गए

मुहावरे की भाषा में ही इसे कहना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत दिल्ली आए। साफ मन और दिल से आए। सज-धजकर आए। चार दिन रहे। अपने कथन…

अपने-अपने दिग्भ्रम

  चुनाव आयोग की पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा के बाद सभी दलों ने अपनी रणनीति घोषित कर दी है। लेकिन इन चुनावों में जितनी दिग्भ्रमित कांग्रेस दिखती है, उतना…

अयोध्या के विकास को लगे पंख

अयोध्या धर्म और सियासत दोनो के केन्द्र में सदियों से रहा। कई सियासी दलों की सियासत को तो परवान पर ही अयोध्या ने चढ़ाया। अयोध्या का मतलब ही होता है…

अंग्रेज तो चले गए अंग्रेजियत रह गयी

  अंग्रेजी के ‘फ्रीडम’ शब्द और भारतीय भाषाओं के ‘स्वतंत्रता’ और उसके समानार्थी शब्दों को पर्यायवाची के रूप में उपयोग किया जाता है। लेकिन दोनों के अभिप्राय में जमीन-आसमान का…

कम्युनिस्टों से मिलता है भारतीय राजनीति के अघोरपंथ को बौद्धिक समर्थन

इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव के परिणामों से स्पष्ट है कि जवाहर लल नेहरू विश्वविद्यालय अभी भी वामपंथियों का गढ़ बना हुआ है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उन्हें चुनौती देने की…

विपक्षी राजनीति की दिशा

  आम चुनाव आते ही भारतीय राजनीति दलीय समर में बदल जाती है। अगले वर्ष आम चुनाव होने हैं और उसके लिए अभी से राजनैतिक समर आरंभ हो चुका है।…

चुनौती नदी बचाने की

  सद्गुरु जग्गी वासुदेव का नदी अभियान विनोबा के भूदान आंदोलन सरीखा है। विनोबा ने तब के सबसे बड़े सवाल पर जनमत जगाया। वैसे ही आज सबसे बड़ी चुनौती नदी…