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मीडिया

अद्भुत है अयोध्या

ऋषि, मुनि, योगी, तपस्वी, साधक, ब्राह्मण अति प्रिय हैं। दर्शन और उपदेश ग्रहण करते हैं। प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं। सृजन करने वालों को अभय। धर्म की रक्षा करते हैं। नारी…

रामलला के दाऊ – अयोध्या के योद्धा

एक बार नामज स्थल पर सूअर के घुस जाने की अफवाह फैल गई और उपद्रव के हालात पैदा हो गए। कुछेक मुस्लिम उपद्रवी तत्वों ने खन्ना और दूसरे कांग्रेसियों पर…

प्रभाष प्रसंग में ‘गांधी होते तो क्या करते-नौ सूत्री कार्यक्रम’ विषय पर होगा डा. अभय बंग का व्याख्यान

सर्वोदय विचार के गांधीवादी परिवार में श्री अभय बंग का जन्‍म हुआ। वर्धा, महाराष्‍ट्र में ठाकुरदास और सुमन बंग के घर सन् 1950 में वे जन्‍में। सर्वोदय आंदोलन से जुड़े…

लॉकडाउन में महिलाओं के साथ साइबर क्राइम में 65 फीसदी तक की बढ़ोतरी 

कोरोना के चलते देश में भर में चल रहे लॉकडाउन के कारण जहां सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग काफी बढ़ा है वहीं, इसको लेकर अपराध में भी बढ़ोतरी हुई…

कोरोना के लिए निर्दोष साबित हुए चमगादड़

कोरोनो वायरस इंसानों में कैसे पहुंचा यह अब भी शोध का विषय बना हुआ है। भारतीय वैज्ञानिक मानते हैं कि चमगादड़ों में पाया जाने वाला कोरोना वायरस इंसानों के कोरोना…

ऐसे हैं, हमारे कौल साब

वरिष्ट पत्रकार जवाहरलाल कौल को जनसत्ता से रिटायर हुए करीब एक दशक हो चुकें हैं, लेकिन उनकी कलम अभी रिटायर नही हुई। बल्कि सामाजिक सरोकारों के साथ उनकी कलम की…

धीमी पत्रकारिता का सत्याग्रही संपादक

इसाबेल हॉफ्मायर आजकल खबरें बिजली की गति से चलती हैं। यह पत्रकारिता पाठक की आंख से होते हुए सीधे उसकी जेब में उतरना चाहती है। ऐसे में सन् 1898 में दक्षिण अफ्रीका…

गांधी मूलरूप से संवादी पत्रकार थे – ‘गांधी की पत्रकारिता’ पुस्तक अंश

'गांधी की पत्रकारिता' पुस्तक अंश इंगलैंड जाने से पहले गांधी एक सामान्य जिज्ञासु विद्यार्थी थे। इंगलैंड वे पत्राकारिता करने नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई, कैरियर या व्यावसायिक प्रगति के लिए गए…

जनसत्ता के क्रमिक क्षय पर विचार करना एक दर्द भरा काम है

15 जनवरी, 2000 को विवेक गोयनका का सभी लोगों को पत्र मिला जिसमें वे समूह के सीईओ बनाए गए। वे इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक तो थे ही। यह नया…

प्रभाष जोशी ने सीईओ का पद ठुकराया, शेखर गुप्त ने सहर्ष स्वीकारा – इतिहास जनसत्ता का

क्षेत्रीय अख़बारों से आये लोगों ने प्रभाष जोशी की अंगुली पकड़कर जनसत्ता को बनाया। तब एक संरक्षक का भाव था। प्रभाष जोशी ने जब संपादकी छोड़ी तब जनसत्ता चार जगहों…