प्रभाष जोशी के बाद वैसा नेतृत्व जनसत्ता को मिल न सका -जनसत्ता जो दुबारा जन्मा
उस समय दिल्ली का जनसत्ता करीब दो लाख के आस-पास छपता था। एक्सप्रेस के प्रबंधन का तर्क माने तो उन दिनों न्यूज़ प्रिंट के दाम बढ़ने से कठिनाई ज्यादा हो…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
उस समय दिल्ली का जनसत्ता करीब दो लाख के आस-पास छपता था। एक्सप्रेस के प्रबंधन का तर्क माने तो उन दिनों न्यूज़ प्रिंट के दाम बढ़ने से कठिनाई ज्यादा हो…
। लेकिन पत्रकारिता मिशन तो तब थी जब देश के सामने स्वाधीनता का मर मिटने वाला लक्ष्य था। एक स्वाधीन लोकतान्त्रिक देश की पत्रकारिता का वह मिशन कभी नहीं हो…
कुछ दिनों बाद बोफोर्स तोप सौदे का मामला स्वीडन रेडियो की खबर से सामने आया। यही तब भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मुदद बना। जनसत्ता की उस आंदोलन में एक खास…
...जनसत्ता उस अभियान का जरिया नहीं बना जरुरी ख़बरें छपती रहीं। इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय लेख जनसत्ता में नहीं छपता था। अलबत्ता एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस से ख़बरें ली जाती थी।…
वैसे तो हर अख़बार की अपनी शैली होती है। उसके लिए शैली पुस्तिका बनाई जाती है, जिसमें वर्तनी का विवरण रहता है। 1980 में आनंद जैन ने नवभारत टाइम्स के…
एक्सप्रेस की नई बिल्डिंग के विवाद को सुप्रीम कोर्ट में चले मुकदमें की नजर से जो लोग देखेंगे वे इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि जनसत्ता को निकालने की जरुरत उसके…
इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी 1977 को लोकसभा के विघटन करने और मार्च में चुनाव कराने की घोषणा कर नई चुनौती उछाली। उस समय इलाहाबाद में महाकुंभ लगा हुआ था।…
उन्ही दिनों इंदौर में 15-16 साल के प्रभाष जोशी गुजराती कॉलेज में फर्स्ट इयर विज्ञान के छात्र थे। वे याद करते हैं - नौकरी-करियर जैसी चीजों में कभी मन नहीं…
महात्मा गांधी जन्मशताब्दी के साल भर चले समारोहों से प्रेरित होकर देश उस रास्ते पर भले ही न चला हो, लेकिन उसकी एक उपलब्धि हिंदी पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही। क्रांतिकारी…
कुलदीप नैयर जनांदोलन और सत्ता दोनों के बीच गहरी पैठ रखते हुए लोकतंत्र को मजबूती देने का जो काम उन्होंने किया, वह इतिहास में याद किया जाएगा। भारत-पाकिस्तान दोस्ती के…
कांग्रेस की कमान किसके हाथ में है? अगर किसी को यह भ्रम है कि राहुल गांधी कांग्रेस को चला रहे हैं तो उसे दिल्ली की घटना को ध्यान से देखना…
अधिक चुनौती भरी पत्रकारिता स्वतंत्र पत्रकारिता दिनोंदिन चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। इसे हाल में घटी तीन घटनाओं से समझा जा सकता है। अमेरिका को स्वतंत्र पत्रकारिता का एक मानक…