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मार्क्सवाद एक पतनकारी विचार

लगभग सौ वर्ष पूर्व 1917 में रूस में साम्यवादियों को सत्ता प्राप्त हुई थी। उससे पहले यूरोप में भी कार्ल मार्क्स और उनकी स्थापनाओं के बारे में कम ही लोगों…

जब इंडियन एक्सप्रेस को जनसत्ता की प्रशिक्षु टीम ने निकाला – जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

...जनसत्ता उस अभियान का जरिया नहीं बना जरुरी ख़बरें छपती रहीं। इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय लेख जनसत्ता में नहीं छपता था। अलबत्ता एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस से ख़बरें ली जाती थी।…

यूरोपीय अजेयता की सीमाएं

  अभी यूरोपीय जाति की शक्ति का आधार उसकी आर्थिक समृद्धि नहीं, उसकी प्रतिनिधि शक्ति अमेरिका की सामरिक अजेयता है। दूसरे महायुद्ध में जापान के दो नगरों, हिरोशिमा और नागासाकी…

भारत और किसान दोनो से कटे हैं कम्युनिस्ट

खेती किसानी को लेकर बातें बहुत सारी हो रही। किसानों की समस्याओं के नाम पर आंदोलन हो रहे। या यूं कहें कि इन आंदोलनों के जरिए कुछ संगठन अपनी विचारधारा…

यूरोप में जनसंख्या और समृद्धि

  पिछली लगभग आधी शताब्दी तक पश्चिम के अर्थशास्त्री गैर-यूरोपीय देशों को यह समझाते रहे हैं कि उनकी गरीबी का कारण उनकी जनसंख्या में हुई अपूर्व वृद्धि है। गैर-यूरोपीय देशों…

मैकाले की शिक्षा प्रणाली ने हमारे दिमाग को क्षतिग्रस्त कर दिया

इस देश में लोगों को कैसे शिक्षित किया जाए, जो मानते हैं कि अभी तक लागू मैकाले सिस्टम ने उन्हें अच्छा भविष्य दिया है। ऐसे लोग क्या वास्तव में भारतीय…

रेत की दीवार पर खड़ा महल

  आज यूरोप और अमेरिकी अर्थव्यवस्थाएं ढलान पर हैं। 1970 में समृद्धि का शिखर छू लेने के बाद उनकी आंतरिक ऊर्जा चुक गई सी लगती है। पिछले कई दशक से…

सबको खबर दे-सबकी खबर ले, जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

वैसे तो हर अख़बार की अपनी शैली होती है। उसके लिए शैली पुस्तिका बनाई जाती है, जिसमें वर्तनी का विवरण रहता है। 1980 में आनंद जैन ने नवभारत टाइम्स के…

खेती किसानी की भारतीय बादशाहत को किसकी नजर लगी

पौधों और वनस्पति की दुनिया में काम करने वाले जानते हैं कि 16 वीं सदी में पुर्तगाली गार्सिया डि ओर्टा ने पौधों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में एक स्थानीय…

वैचारिक कंगाली का शिकार नक्सली

माओवाद से प्रेरित चारू मजूमदार ने 22 अप्रैल 1969 को जिस नक्सली संगठन की घोषणा की थी उसका नाम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(माक्र्सवादी-लेनिनवादी) रखा था। ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि…

गणेश और आधुनिक बुद्धिजीवी

मुझे लगता है कि यदि मैं ‘बौद्ध धर्म और आधुनिक बौद्धिकता’ पर कुछ कहता तो अधिकांश लोग गौर नहीं करते। लेकिन गणेश? मुझे हमेशा ही या तो गहरी निराशा या…

जनसत्ता जो दुबारा जन्मा -इतिहास जनसत्ता का

एक्सप्रेस की नई बिल्डिंग के विवाद को सुप्रीम कोर्ट में चले मुकदमें की नजर से जो लोग देखेंगे वे इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि जनसत्ता को निकालने की जरुरत उसके…