राजनीतिक वंशवाद की विषबेल
फ्रैंक मोरिस ने 1960 में एक बार लिखा था, "ऐसा बिल्कुल ही नहीं लगता कि पंडित नेहरू परिवारवाद को आगे बढ़ाएंगे, यह उनके चरित्र और उनके पूरे करियर को…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
फ्रैंक मोरिस ने 1960 में एक बार लिखा था, "ऐसा बिल्कुल ही नहीं लगता कि पंडित नेहरू परिवारवाद को आगे बढ़ाएंगे, यह उनके चरित्र और उनके पूरे करियर को…
यदि कुछ पर्यावरणीय हानि उठानी भी पड़ती है तो इसे इसलिए स्वीकारा जाना चाहिए, क्योंकि यह बृहद परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक उद्देश्यों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा…
उदाहरणस्वरूप स्वनामधन्य मगध विश्वविद्यालय है, जहाँ किसी भी कोर्स की पढ़ाई पूरी करने में निर्धारित से दुगुना समय लगता है. कुछ दिनों पूर्व तीन साल से लंबित (Pending) परिणामों…
तात्पर्य यह है कि संविधान ना सिर्फ लोगों को अधिकार देता है बल्कि उसकी सुरक्षा भी करता हैं. हालांकि मूल अधिकारों के उपयोग में संयम की बड़ी आवश्यकता एवं समझ…
विडम्बना ही है कि मौजूदा दौर की महानगरीय संस्कृति में विसंगतियों से भरे इन रिश्तों को क्रांतिकारी माना जा रहा है | जबकि ऐसे संबंध जीवन की व्यवहारिकता से…
इसमें मिडिया जगत विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मिडिया भी एक प्रमुख कारक है. प्रथम तो यह नेताओं की सुर्खियों में बने रहने भावना का लाभ उठाता है. वर्तमान में राजनीतिज्ञ होने का…
पुराने लोगों की मानें तो चार-पांच दशक पूर्व तक होली कुदरती तत्वों अर्थात टेसू, केसर, मजीठ आदि के रंगों से खेली जाती थी। बसंत पंचमी को होलिका रखने के बाद…
देश में अगर किसी भाषा के संवैधानिक अधिकारों कि माँग सबसे सार्थक हैं तो वो भोजपुरी ही है. 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार झारखण्ड, बंगाल आदि…
कांग्रेस में या तो योग्य नेतृत्व का अभाव है या वह चाहती ही नहीं कि प्रबुद्ध एवं जनाधार वाले नेता उसका प्रतिनिधित्व करें. एक तरफ उसके नेता उदित राज एवं…
इन विवादों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार के संरक्षण की जो जिम्मेदारी देश के सर्वोच्च न्यायालय की है, आश्चर्यजनक रुप से उसका निर्वहन अत्यंत चयनित तरीके से…