लेखक के लेख

राकेश सिंह

हमनें अपने हलों को अभी अभी रंगना शुरू किया ..

खेती किसानी तो भारतीय जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण अंग था। पग पग पर इसकी निशानियां आपको मिलेगी। पुरखों के किस्से भी उसी अतीत सुनाते हुए मिलेंगे।  इसी तरह जाने माने इतिहासकार…

‘कोरोना के बाद राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना’ विषय पर मनीषी राम बहादुर राय का व्याख्यान

'कोरोना के बाद राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना' विषय पर मनीषी राम बहादुर राय का व्याख्यान दिनाँक 04/02/2020

कितनी भोली हैं सोनिया?

सामाजिक राजनैतिक जीवन के हर व्यक्ति पर बहस होनी चाहिए, यह जरूरी है। क्युकी उससे देश प्रभावित होता है। कोई अपवाद नहीं हो सकता है। अर्णव हम आपके शुक्रगुजार है…

गांधी, ग्राम स्वराज्य और हमारा संविधान

आज पंचायती राज दिवस है। एक बार ठहरकर सोचें। अपने संविधान को भी निहारे, और देखें की गांधी का ग्राम स्वराज उसमें कहां था। बनाने वालों ने आखिर आजादी के…

स्वतंत्र भारत में भूमि सुधार

जमींदारी प्रथा का अंत हो चुका है। इसके साथ ही किसानों को जमीन का हक मिला। किसानों को मिला अधिकार भी काफी कुछ पन्नो पर ही है। वास्तविकता से काफी…

इनकी जाहिलियत ऐसी कि डगमगा गई थी गांधी की अहिंसा

जाहिलों की जाहिलियत जारी है। जाहिलियत एक सोच है। अगर यह सोच किसी मजहब का आधार ही बन जाए तो समझो कि खतरा आपके सबसे करीब है। इससे निपटने के…

अपना – अपना स्वधर्म

दूसरे का धर्म सरल मालूम हो तो भी उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। बहुत बार सरलता आभासमात्र ही होती है। घर गृहस्थी में बाल बच्चो की देखभाल नहीं कर पाता,…

कोरोना और लाल चीटिंयां, दोनो से बचना है

कोरोना के साथ-साथ कम्युनिस्ट विचार भी किसी सभ्य राष्ट्र और समाज के लिए खतरनाक है। इस विचार के भारतीय वाहक इसकी गवाही चीख चीख कर देते हैं। आज जब पूरा…