लेखक के लेख

राकेश सिंह

ऐसे हैं, हमारे कौल साब

वरिष्ट पत्रकार जवाहरलाल कौल को जनसत्ता से रिटायर हुए करीब एक दशक हो चुकें हैं, लेकिन उनकी कलम अभी रिटायर नही हुई। बल्कि सामाजिक सरोकारों के साथ उनकी कलम की…

जब सन्यासियों के साथ मिलकर किसानों ने गया वंदेमातरम्..

भारत में किसान आंदोलनों की एक लंबी और सतत श्रृंखला है। किसान संघर्ष इतिहास में अपना अलग महत्तव रखते हैं। इन आंदोलनों ने कई ऐतिहासिक अवसरों पर निर्णायक भूमिका निभाई।…

जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एकजुट होने लगे अवध के किसान

अंग्रेजी हुकूमत ने अवध इलाके पर अपना बर्चस्व कायम की। वह साल था 1856 का। अवध पर अंग्रेजी हुकूमत स्थापित होने के बाद अपने शासन शैली के हिसाब से काम…

राम लोकतांत्रिक हैं क्योंकि अपार शक्ति के बावजूद मनमाने फैसले नहीं लेते

जिसमें रम गए वही राम है. सबके अपने-अपने राम हैं. गांधी के राम अलग हैं, लोहिया के राम अलग. वाल्मीकि और तुलसी के राम में भी फर्क है. भवभूति के…

क्या सी. राजगोपालाचारी भारत विभाजन के मंत्रदाता थे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे कुंवर नटवर सिंह दूसरों से भिन्न हैं। राजनीति की मुख्यधारा में सक्रिय नहीं रहते हुए भी वे अपनी उपस्थिति समय-समय पर अनुभव कराते रहते हैं।…

प्रयाग.. प्रयाग केवल प्रयाग !

मैंने अपनी निरक्षर और लगभग संपूर्ण जीवन वैधव्य में काटने वाली दादी को कभी अल्लाहाबाद कहते नहीं सुना था । वे ताउम्र प्रयाग ही कहती रहीं । मैं यह साफ़ अनुभव…

कौशल के साथ पत्रकारिता, तथ्यपरक जानकारी और निर्भीकता से अपना दृष्टिकोण रखने का माध्यम बनी रहेगी तब तक वह सिर्फ व्यवसाय के लेन – देन वाले धंधे में नहीं बदल सकती, इतिहास जनसत्ता का

। लेकिन पत्रकारिता मिशन तो तब थी जब देश के सामने स्वाधीनता का मर मिटने वाला लक्ष्य था। एक स्वाधीन लोकतान्त्रिक देश की पत्रकारिता का वह मिशन कभी नहीं हो…

लेकर रहेंगे आजादी, आखिर ले ही ली आजादी, 377 से…

पानी गिर रहा था। बहुत पानी गिर रहा था। बारिश की ये बूंदे उनके आंनद को चरम की ओर ले जा रही थी। ये ‘नई उम्र की नई फसल’ थी । ‘खाए-पीए-अघाए’ जैसे लोग…