लेखक के लेख

राकेश सिंह

पंचायतें सामाजिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र का स्वरूप

जय प्रकाश नारायण पंचायत राज प्रणाली सामाजिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र का एक स्वरूप है। यह आदर्श रूप में एक सुपरिभाषित सामाजिक एवं राजनीतिक दर्शन भी है। लेकिन सच यह है…

क्या भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष है

बृजकिशोर शर्मा 'पंथनिरपेक्ष’ शब्द का संविधान की उद्देशिका में समावेश करने का केवल इतना अर्थ हुआ कि हमने नामपट्ट में राज्य को पंथनिरपेक्ष घोषित कर दिया। इस घोषणा का प्रभाव…

स्वतंत्र भारत में गांवों का स्थान

    इस समय सत्ता का केंद्र बिंदु दिल्ली, कोलकाता या मुंबई अर्थात बड़े नगरों में है। मैं उसे भारत के सात लाख गांवों में बांटना चाहूंगा।’ अपनी इस आकांक्षा…

हर घर तक पहुंचने वाला बैंक

  भारत जैसे विशाल देश में किसी केंद्रीय सत्ता के 50 माह का कालखंड बहुत छोटा माना जाएगा, लेकिन जब चुनौती बड़ी हो और दांव पर देश का वर्तमान एवं…

नैयर से पीएन हक्सर ने क्यों कहा कि, बयान दे कि शास्त्री जी की मौत प्राकृतिक है हत्या नही…?

कुलदीप नैयर जनांदोलन और सत्ता दोनों के बीच गहरी पैठ रखते हुए लोकतंत्र को मजबूती देने का जो काम उन्होंने किया, वह इतिहास में याद किया जाएगा। भारत-पाकिस्तान दोस्ती के…

एटम बमों के जोर पर एंठी है ये दुनिया, बारूद के ढेर पर बैठी है ये दुनिया

देशभक्ति और इंसानियत जैसे शब्द धीरे-धीरे हमारी युवा पीढ़ी और बच्चों के लिए अर्थविहीन होते जा रहे हैं। ऐसे में फिल्म ‘जागृति’ एक पाठशाला की तरह है। दरअसल, आजादी का…

मोदी चाहते हैं कि महात्मा गांधी के विचारों को समाज अपने जीवन में उतारे

महात्मा गांधी-150  एक महान अवसर हो सकता है। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय आयोजन समिति की जो पहली बैठक हुई है, उससे भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप…

भुखमरी की राजनीति और अर्थशास्त्र

  अक्टूबर,2017 के दूसरे सप्ताह में जब वाशिंगटन से कार्यरत इंटरनेशनल फ़ूड पालिसी रिसर्च इंस्टीच्यूट ने जब यह रिपोर्ट दी कि 119 देशों की सूचि में भारत 100वें पायदान पर…

अमीरों के बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों ?

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सुनवाई की है टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक…