लोकनीति केंद्र

सभी लेख

राज्यसभा की घटना-विपक्ष की खोटी चाल

कोरोना काल में टेक्नालाजी के किसी भी प्लेट फार्म से अगर आपको संवाद करना है तो दो शब्दों से बच नहीं सकते, म्युट और अनम्युट। डिक्शनरी में म्युट शब्द अब…

हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में नया ध्रुवीकरण

हिंद-प्रशांत क्षेत्र तेजी से अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसका प्रमाण इस क्षेत्र की चार बड़ी शक्तियों के विदेश मंत्रियों की छह अक्टूबर को तोक्यो में…

विपक्ष की राजनीति की निरर्थकता

भारतीय राजनीति में विपक्ष की भूमिका जिस तेजी से निरर्थक होती जा रही है, वह सबके लिए चिंता का विषय होना चाहिए। नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल शुरू हुए लगभग…

सार्थक लोकतंत्र के महानायक-जेपी

  महात्मा गांधी ने परस्पर विपरीत प्रवृतियों के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को स्वाधीनता संग्राम की संघर्ष  धारा से जोड़ा। उनमें एक जेपी थे। यही उनका लोकप्रिय नाम है। जिन्हें बिहार आंदोलन…

महिमा ‘कोदंड रामकथा’ की – कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों………..

कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों। मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥ कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि चाप बिसिख सुधारि कै। चितवत…

एक रहस्य जो उजागर हुआ

आर.के. सिधवा का भाषण इस कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहेगा क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों की कुटिल चाल का पर्दाफास किया। अंग्रेज भारत के लोगों को पंथ, भाषा, क्षेत्र और अन्य…

गिलगित-बाल्तिस्तान चिंगारी बन सकता है

लद्दाख में भारतीय सेना की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने पाकिस्तान को भी मुश्किल में डाल दिया है। लद्दाख की सीमाएं पाकिस्तान के नियंत्रण में पड़े हुए गिलगित-बाल्तिस्तान से लगती…

धर्मपाल जन्मशताब्दी – स्वातंत्रयोत्तर भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा

1% लोगों ने देश को अपने चंगुल में जकड़ा हुआ है और 10% लोग उनके माया-जाल में जाने- अंजाने फंसे हुए हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा कि इनकी “सिविल लाइंस” अलग…

क्या पाकिस्तान का कोई भविष्य है?

पाकिस्तान इस समय अपने जीवन के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। लगभग दो वर्ष पहले इमरान अहमद खान नियाजी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। उस समय पाकिस्तान की…

पत्रकार के रूप में गांधी की यात्रा

हिंदी नवजीवनः गुजरात में हिंदी पत्रकारिता के विकास में गांधी का महत्वपूर्ण योगदान है। हरिभाऊ उपाध्याय, जो कुछ वर्षों तक ‘हिंदी नवजीवन’ नामक साप्ताहिक पत्र के संपादन कार्य में गांधी…

आखिरी व्यक्ति की चिंता गांधी जी की पत्रकारिता का आधार थी

देश आजाद हुआ है तो यह गांधी के आत्मबल से आजाद हुआ। जिसने लाठी भी नहीं चलाई और यह उनके आत्मबल का भी सहारा था कि उसने देश को आजाद…