प्रज्ञा संस्थान
सा विद्या या विमुक्तये
दृढ़ता और वीरता
अनुशासन की आवश्यकता
‘गीता’ हमारे हृदय और हमारी बुद्धि दोनों को तुष्ट करती है
प्रार्थना के अर्थ और आवश्यकता
स्वराज के लिए आवश्यक है निर्भयता
ज्यादा कभी नहीं रही है। मैं आपसे कहता हूं कि आप संख्या थोड़ी होने की चिंता न करें, बल्कि याद रखें कि आप कितने ही थोड़े हों, लेकिन देश…
हिन्दुस्तान का हर एक घर विद्यापीठ है, महाविद्यालय है; मां-बाप आचार्य हैं।
गांधी जी ने गुजरात महाविद्यालय के उद्घाटन के अवसर पर भाषण दिया। यह भाषण गुजराती में था। गांधी जी के इस भाषण को गुजराती नवजीवन में 18 नवंबर 1920 को…
हमें सामान्य व्यवहार को बंद करके आपद्-धर्म का आचरण करना चाहिए
आत्मसंयम, अनुशासन और बलिदान के बिना राहत या मुक्ति की आशा नहीं की जा सकती
गांधी जी ने 20 अक्टूबर 1920 को यंग इंडिया में एक लेख लिखा। इस लेख के जरिए गांधी जी ने प्रशिक्षित स्वंसेवकों की आवश्यकता को समझाया। उन्होंने इस लेख से…
असहयोग के समर्थन में कुछ बातें
गांधी जी ने गुजराती के नवजीवन, 3-10-1920 अंक मेंं असहयोग पर लिखा। इस लेख के इस वाक्य से इसका सार समझ सकते हैं।अगर शिक्षकों में वीरता या बहादुरी आ जाए,…
पुरूषार्थ से ही मिलेगा स्वराज
गांधी जी ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय उद्घाटन समारोह में 4.2.16 को दिया। गांधी जी का यह यादगार भाषण हमारे लिए एक राह दिखाता है। एक ऐसा रास्ता जो हमें स्वराज…











