अभिलेखागार
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राजनीतिक भूकंप
भारतीय लोकतंत्र अपनी यात्रा के नए पड़ाव पर है। यह नयापन आशाप्रद है। इसमें सकारात्मकता है। लेकिन एक समूह ऐसा भी है जो 17वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम की…
मोदी की विलक्षणता
मोदी सरकार ने अपनी नीतियों की दिशा को लेकर कोई समझौता नहीं किया। स्वयं नरेंद्र मोदी को यह भरोसा था कि उन्होंने देश के साधनहीन लोगों के लिए जो…
धीमी पत्रकारिता का सत्याग्रही संपादक
गाँधीजी को याद करने की दो तारीखें तय हैं। 2 अक्टूबरः जन्म। 30 जनवरीः हत्या। सरकारी कैलेंडर में ये तारीखें और दिल्ली की गाँधी समाधी रस्म अदायगी के खूंटे…
बदलाव का हर पीढ़ी को अधिकार
संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी से संविधान सभा को वैधानिक और आत्मिक बल मिला।…
ईरान संकट से उबरने की चुनौती
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत के लिए ईरान से तेल खरीदना लगभग असंभव हो गया है। सऊदी अरब और इराक के बाद हम सबसे अधिक खनिज तेल ईरान से…
चेतावनी जो सही निकली
संविधान सभा के पांचवें दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव रखा। वे चाहते थे कि उसे संविधान सभा बिना बहस के पारित कर दे। वैसा हुआ…
एक रहस्य जो उजागर हुआ
लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर संविधान सभा ने डा. भीमराव अंबेडकर का भाषण दत्तचित्त होकर सुना। इसकी पुष्टि अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद की एक टिप्पणी से होती है। जो संविधान…
आधुनिक जीवन का आधार राष्ट्रीयता है!
संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर दूसरे चरण की बहस महीने भर बाद फिर से शुरू हुई। इस अवधि में मुस्लिम लीग की प्रतीक्षा…
आतंकवाद की फैक्ट्री बने मदरसे
पाकिस्तान भी मानता है कि मदरसे आतंकवाद के प्रशिक्षण स्थल बन गए हैं। इसलिए उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर…
अलगाव की राजनीति
फारूक अब्दुल्ला व महबूबा मुती की ओर से दिये जा रहे अलगाववादी बयानों पर कांग्रेस की चुप्पी हैरान करने वाली है। इन चुनावों ने यह सिद्ध कर दिया है…
यहां अली और बजरंग बली
सभी दल मुसलमानों का इस्तेमाल करते हैं। यह लड़ाई हिन्दू और मुसलमानों के बीच की नहीं है। हिन्दुओं के बीच की ही दो विचारधाराओं की लड़ाई है। अपने आपको…











