प्रयागराज का अर्द्धकुंभ
कुंभ मूलत: साधु-संन्यासियों के इकट्ठा होने का अवसर था, लेकिन अंग्रेजों के समय कुंभ का स्वरूप मेले का बना दिया गया। स्वतंत्रता के बाद भी सरकारों ने कुंभ के…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
1,291 लेख मिले
कुंभ मूलत: साधु-संन्यासियों के इकट्ठा होने का अवसर था, लेकिन अंग्रेजों के समय कुंभ का स्वरूप मेले का बना दिया गया। स्वतंत्रता के बाद भी सरकारों ने कुंभ के…
राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहुल गांधी को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई आसानी से नहीं होगी। हमारा देश रक्षा के मामले और खासकर लड़ाकू…
यह मात्र संयोग नहीं था कि भारत सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास के लिए 26 नवंबर का दिन चुना। इस कॉरिडोर को बनाए जाने की घोषणा पहले पाकिस्तान…
एक बार फिर केरल के उच्च न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर की परंपराओं की रक्षा का आदेश दिया है। श्री अयप्पा के भक्तों की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई…
सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या मामले की सुनवाई लंबी खिंचती चली जा रही है। पहले न्यायालय ने यह आशा व्यक्त की थी कि दोनों संप्रदाय के सुधीजन इस मामले को…
बुनियादी तौर पर विकास दो आयामों में अभिव्यक्त होता है, एक तो भौतिक दूसरे चेतनागत। जब विकास की इन दोनों परिभाषाओं में अनुलोम सम्बन्ध होता है तो मानव सभ्यता…
इरफ़ान हबीब के प्रति मेरे मन में कभी कोई शंका नहीं रही। मैं उन्हें बहुत पहले से बेईमान इतिहासकार मानता रहा हूं लेकिन जिस व्यक्ति की ख्याति मध्यकालीन भारत में…
आजाद हिंद फौज की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी लाल किले पर झंडा फहराकर सुभाष चंद्र बोस और देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनके…
साइकिल पैरों के गति का विस्तार है। जहाज कदमों के अधिकतम तीव्र गति का विस्तार है।एक दौर वह भी था ,जब देश विलंबित गति से चल रहा था। अब एक ऐसे दौर में भी देश पहुंच गया है , जहां राजमार्गों का संजाल बिछा हुआ है। विलंबित गतिसे चल रहे देश के पैरों को तीव्र गति देने में नितिन गडकरी की महती भूमिका रही है। ‘ राजमार्गों के शिल्पी ‘ नितिन गडकरी की आंखों में अब विशालसंभावनाओं वाली सदानीरा नदियां रच बस रही हैं। इन नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित कर समूचे देश में बड़े पैमाने पर विकास के काम चल रहे हैं। इसीकड़ी में सोमवार को वाराणसी में जल मार्ग से कंटेनर कार्गो की व्यावसायिक चहल कदमी दिखी। प्राचीन देश ने वह स्वर्णिम दौर भी देखा है , जब उसकेउत्पाद इन्हीं नदियों के जरिए समूची दुनिया मे पहुँचे। फिर देश उसी दिशा की ओर जा रहा है, जिस दिशा में चल कर उसने अतीत में स्वर्णिम बुलंदियों कोहासिल किया था। ग़ौरतलब है कि गंगा पर 5370 करोड़ की लागत से जलमार्ग बनाने का काम किया जा रहा है। गंगा में हो रहा यह काम अब दिखने लगा है। वाराणसी इसकासटीक उदाहरणहै।200 करोड की लागत से 2016 में काम शुरू हुआ। इसी जेटृी पर सोमवार को कंटेनर कार्गों का आगमन हुआ है। यहाँ से 13 लाख टन सामानकी हर साल ढुलाई हो सकेगी।
जिसमें रम गए वही राम है. सबके अपने-अपने राम हैं. गांधी के राम अलग हैं, लोहिया के राम अलग. वाल्मीकि और तुलसी के राम में भी फर्क है. भवभूति के…
गुजरात में नर्मदा के तट पर सरदार पटेल की 182 मीटर की प्रतिमा का अनावरण स्वतंत्र भारत की एक महत्वपूर्ण घटना है। यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है…
त्रेतायुग के बाद पिछले बरस की तरह इस बार भी दीवाली ऐसी रही कि अयोध्या निहाल हो उठी। इतिहास करवट ले रहा था। काल का पहिया घूम गया। पहुंच गया दीवाली…