विषय संग्रह

कला साहित्य

गीता में हम उस सत्य को ढूंढ़ते हैं जो सनातन है, शास्वत है

गीता का विचार करते समय हम उस सत्य को ढूंढ़ते हैं, जो सनातन है। जिससे अन्य सभी सत्य पैदा होते हैं। इसी कारण वह परम-सत्य किसी एक पैने सूत्र के…

नीलकंठ —– बाबा के स्पर्श से मिलता है संबल

हर लेते  हैं जीवन का तमस..... धार्मिक यात्राएं भी अपने आप में अनोखी और स्फूर्ती देने वाली  होती है। मेरे कई सालों के अनुभव से मैं कह रही हूं। क्योंकि…

फुटपाथ पर बिकते शर्मा और शुक्ल के ‘सप्रेंम भेंट’

दृश्य-एक। ‘युद्ध में अयोध्या’ व ‘अयोध्या का चश्मदीद’ के लेखक व चर्चित पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी पुस्तक ‘तमाशा मेरे आगे’ को ३० दिसंबर २०१४ को लार्ड मोहन सहाय को…

उत्सव है या हिंदी का ‘श्राद्ध-पक्ष’!

हिंदी को हिंद के माथे की बिंदी होनी चाहिए थी। क्या माथे की बिंदी बन पाई? सवाल का जवाब नैराश्य भरा है। बिंदी नहीं बन पाई। जिसे मालकिन बनना था,…

एटम बमों के जोर पर एंठी है ये दुनिया, बारूद के ढेर पर बैठी है ये दुनिया

देशभक्ति और इंसानियत जैसे शब्द धीरे-धीरे हमारी युवा पीढ़ी और बच्चों के लिए अर्थविहीन होते जा रहे हैं। ऐसे में फिल्म ‘जागृति’ एक पाठशाला की तरह है। दरअसल, आजादी का…

अवध के अदबी सितारे अपने ही घर में हुए किनारे

भदरसा। फैजाबाद शहर से 10 किमी दूर।यहीं पर बिब्बो पैदा हुई।उस समयकौन जानता था कि यह बच्ची भविष्य की मल्लिका ए गजल बेगम अख़्तर है। तबका भदरसा गांव अब छोटा…

आज भी प्रासंगिक हैं मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं

महाराष्ट्र का एक बड़ा हिस्सा विदर्भ है जो कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संभाग में ज्यादा बड़े…

कला, साहित्य और संस्कृति के अदभूत रचनाकार थे प्रेमचंद

वाराणसी, 31 जुलाई (हि.स.)। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द की 138 वीं जयंती पर मंगलवार को महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विविध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर…