लेखक के लेख

रामबहादुर राय

प्रभाष जोशी के बाद वैसा नेतृत्व जनसत्ता को मिल न सका -जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

उस समय दिल्ली का जनसत्ता करीब दो लाख के आस-पास छपता था। एक्सप्रेस के प्रबंधन का तर्क माने तो उन दिनों न्यूज़ प्रिंट के दाम बढ़ने से कठिनाई ज्यादा हो…

लोकहित का अखबारी घराना क्यों बना नवसाम्राज्यवाद का वाहक – इतिहास जनसत्ता का

  रामनाथ गोयनका के निधन से इंडियन एक्सप्रेस समूह पर ग्रहण लग गया। ऐसा हो ही नहीं सकता था कि जनसत्ता उससे अछूता रहे। उनके जीते जी उत्तराधिकार का फैंसला…

जब प्रभाष जोशी पर हमला हुआ, गुरूमूर्ती गिरफ्तार हुए और तेजाबी हमले मे प्रदीप सिंह और संजय सिंह झुलसे – इतिहास जनसत्ता का

कुछ दिनों बाद बोफोर्स तोप सौदे का मामला स्वीडन रेडियो की खबर से सामने आया। यही तब भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मुदद बना। जनसत्ता की उस आंदोलन में एक खास…

जब सरकार ने रिलायंस की हलक से निकाल लिया बैंकों से लिया कर्ज – इतिहास जनसत्ता का

उस समय भी रिलायंस ने सरकार में कितनी गहरी सुरंग बिछा ली थी यह जानने के लिए विश्वनाथ प्रताप सिंह की पुस्तक ‘मंजिल से ज्यादा सफर’ का यह अंश पढ़ें…

जब इंडियन एक्सप्रेस को जनसत्ता की प्रशिक्षु टीम ने निकाला – जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

...जनसत्ता उस अभियान का जरिया नहीं बना जरुरी ख़बरें छपती रहीं। इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय लेख जनसत्ता में नहीं छपता था। अलबत्ता एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस से ख़बरें ली जाती थी।…

सबको खबर दे-सबकी खबर ले, जनसत्ता जो दुबारा जन्मा

वैसे तो हर अख़बार की अपनी शैली होती है। उसके लिए शैली पुस्तिका बनाई जाती है, जिसमें वर्तनी का विवरण रहता है। 1980 में आनंद जैन ने नवभारत टाइम्स के…

जनसत्ता जो दुबारा जन्मा -इतिहास जनसत्ता का

एक्सप्रेस की नई बिल्डिंग के विवाद को सुप्रीम कोर्ट में चले मुकदमें की नजर से जो लोग देखेंगे वे इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं कि जनसत्ता को निकालने की जरुरत उसके…