लेखक के लेख

शिवेन्द्र राणा

सिनेमा : वामपंथी षड़यंत्र एवं राष्ट्रीय प्रतिरोध का संघर्ष

हिंसात्मक दुराग्रहों की पूर्ति का मार्ग खोज लिया है. उसे ज्ञात है कि सोवियत संघ के अनुभव के पश्चात् अब दुनिया इस नये समाज के निर्माण के झांसे में नहीं…

नोटा : विरोध का अधिकार मत छिनिये

समूह एवं कुछ चिन्हित परिवार ही उम्मीदवारों का निर्णय ना कर रहे होते. अब ऐसी राजनीतिक दलों को किस तरह लोकतान्त्रिक माना जाये जिनमें पार्टी के लिए समर्पित, 20-25 साल…

संविधान और हम

लेखकों द्वारा. जैसे राजनीतिशास्त्री रॉबर्ट डल का मानना था कि 'हिंदुस्तान में लोकतान्त्रिक संस्थाओं के विकास की अनुकूल परिस्थितियां नहीं है.' पत्रकार डॉन टेलर ने भाषाओं, धर्मों, नस्लों की विविधता…

राजनीति का जातिवादी संकट

 दक्षिण की तरफ महार जाति से सम्बंधित डॉ. आंबेडकर के दलितों के मसीहा के रूप में स्थापना के समानांतर एवं बराबर प्रतिरोध के लिए कांग्रेस ने उत्तर भारत में चमार…

चुनावी परिणाम स्पष्ट है!

के सबसे अमीर परिवारों में गिना जाने वाला करूणानिधि परिवार भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है.आज भी टूजी स्पेक्टर्म घोटाले के लिए सबसे अधिक द्रमुक सांसदों क़ो ही…

बहुजन राजनीति का संकट

बल्कि बहुजन आंदोलन को कमजोर किया है. कांशीराम क़े बहुत से सहयोगी और दलित छत्रपों जैसे राजबहादुर, शाकिर अली, कालीचरण सोनकर, जंगबहादुर, सोनेलाल पटेल, राशिद अली, आर.के.चौधरी आदि ने बसपा…

आभासी कौतुक का सृजन: कौतुक ऐप

उपन्यास 'कौतुक ऐप' इसी सर्जनात्मक परंपरा का पथिक बना है. सर्जनात्मक चेतना ब्रह्माण्ड में सदैव मौजूद होती है और समय के साथ अपने प्रकटीकरण का मार्ग तलाश लेती है. प्रतीत…

साहित्यिक सृजन से साहित्यिक पतन के आयाम में सिनेमा

विरासत मर रही थी और प्रगतिशील नये दौर का सिनेमाई आंदोलन थकने लगा था. 90 के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के समाजवाद को मनमोहनी उदारवाद के नये कलेवर में ढाल…