लेखक के लेख

बनवारी

खाप को नाहक बदनाम न करो

पंचायती शासन किस तरह के भाईचारे पर टिका रहा है इसका उदाहरण महम चैबीसी से पाया जा सकता है। सामान्यतया जाटों के गोत्र पांच गांव से लगाकर साठ.सत्तर गांवों तक…

ताकि बहती रहे गंगा

  आज से पांच-छ: दशक पहले तक कोई इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता था कि गंगा नदी इतनी प्रदूषित हो जायेगी कि उसके जल को स्वच्छ करने…

कब खड़ा होगा हमारा अपना रक्षा उद्दोग

  पिछले सात दशक से अपनी रक्षा चुनौतियों को हम कितनी अगंभीरता से ले रहे हैं, इसका सबूत सभी तरह की रक्षा सामग्री के लिए हमारा विदेशों पर निर्भर रहना…

पदक का खेल

  हमारी सभी तरह की नीतियों के केंद्र में अब किस तरह समाज की जगह राज्य होता जा रहा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो हमारी आर्थिक नीतियां हैं। पर उसी…

खाप पंचायतें पंचायती व्यवस्था का शक्तिशाली स्वरूप हैं

खाप पंचायतों को लेकर कुछ सालों में एक गलत धारणा बन गई है। खाप पंचायतों को कबीलाई दृष्टि से देखा जाने लगा। लेकिन खाप पंचायतें इस देश की सामाजिक व्यवस्था…

मनुष्य की अमेरिकी परिभाषा

  कल तक जो अमेरिकी संस्थाएं और अखबार चीन का गुणगान करने में लगे हुए थे और उसे विश्व अर्थव्यवस्था का इंजन बता रहे थे, आज वे भारत का गुणगान…

नरेंद्र मोदी का स्वछता अभियान अभी कुछ मुद्दों तक ही सीमित है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बात का श्रेय दिया जाना चाहिए कि उन्होंने अपने आपको दूसरे प्रधानमंत्रियों की तरह केवल राजनीति और अर्थनीति तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राजनीति से…

अपने-अपने दिग्भ्रम

  चुनाव आयोग की पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा के बाद सभी दलों ने अपनी रणनीति घोषित कर दी है। लेकिन इन चुनावों में जितनी दिग्भ्रमित कांग्रेस दिखती है, उतना…

अफ्रीका से मालामाल होने की होड़

  अफ्रीका की जिन बातों ने विश्व की प्रमुख शक्तियों का ध्यान आकर्षित किया है, उनमें उसकी जनसंख्या में युवा लोगों के सर्वाधिक अनुपात के अलावा उसकी बढ़ती हुई आर्थिक…

विश्व में भारतीय  अर्थव्यवस्था का स्थान

  गुजरात में कच्छ जिले के एक गांव सतपार में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत बहुत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा…

अंग्रेज तो चले गए अंग्रेजियत रह गयी

  अंग्रेजी के ‘फ्रीडम’ शब्द और भारतीय भाषाओं के ‘स्वतंत्रता’ और उसके समानार्थी शब्दों को पर्यायवाची के रूप में उपयोग किया जाता है। लेकिन दोनों के अभिप्राय में जमीन-आसमान का…

कम्युनिस्टों से मिलता है भारतीय राजनीति के अघोरपंथ को बौद्धिक समर्थन

इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव के परिणामों से स्पष्ट है कि जवाहर लल नेहरू विश्वविद्यालय अभी भी वामपंथियों का गढ़ बना हुआ है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उन्हें चुनौती देने की…