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भारतीय राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना

भारतीय राज्य व्यवस्था की पुनर्रचना का प्रश्न है बहुत पुराना। राज्य व्यवस्था चाहे भारत की हो या विश्व के किसी देश की हो, इसमें एक समानता हम खोज सकते हैं।…

समय के साथ बदले सहकारिता के कायदे कानून

चौथी पंचवर्षीय योजना ने सहकारी समितियों के पुनर्गठन को प्राथमिकता दी। इसका उद्देश्य था अल्पकालीन और मध्यकालीन सहकारी संरचना को व्यवहारिक बनाना। इस पंचवर्षीय योजना का समय साल 1969 से…

संभावनाओं की सड़क

एक पुरानी कहावत है- 'मैं सड़क पर हूं।' इसका सीधा अर्थ तो यह है- ‘इस समय कोई काम नहीं है और मैं बेकार बैठा हूं।’ इस कहावत के विपरीत आज…

हमनें अपने हलों को अभी अभी रंगना शुरू किया ..

खेती किसानी तो भारतीय जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण अंग था। पग पग पर इसकी निशानियां आपको मिलेगी। पुरखों के किस्से भी उसी अतीत सुनाते हुए मिलेंगे।  इसी तरह जाने माने इतिहासकार…

मैकदा तो मेरी बस्ती के कई घर पी गया..!

इंद्रियाँ है तो उसे रस तो चाहिए ही। रसहीन तो बेरस होता है। सोमपाई तो हमारे पुरखे थे। सोमरस से मिले अद्भुत आनंद का गान अथर्ववेद मे हुआ है। हिमालय…

स्थितियां बदलीं, इरादे नहीं

तबलीगी जमात और इस्लामी इतिहास के सारे विवरण यही दिखाते हैं कि आज स्थितियां बदल गई हैं, मगर इरादा वही है। काफिरी और काफिरों को खत्म करना, और पूरी दुनिया…

ग्राम स्वराज्य के सपने को साकार करेगा, ‘एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम’

गांधी जी ग्राम स्वराज्य की बात करते थे। लेकिन नीति नियंताओंं ने गांधी के गांव को भुला दिया था। योगी सरकार की एक जनपद एक उत्पाद योजना इस सपने को…

हरित क्रांति से आगे अब परंपरागत खेती की ओर लौटना होगा

अब समय है परंपरागत खेती के तरीको की तरफ लौटने का, लेकिन इसमें भी संतुलन की जरूरत है। क्योंकि जितने अन्न की जरूरत हमे होगी वह अकेले जैविक खेती से…

हरित क्रांति के सबक

ब्रिटिश हूकूमत से पहले भारत में खेती भारतीय जीवन शैली का परंपरागत अंग था।पशुपालन भी खेती किसानी का हिस्सा था। खेती स्वतंत्र एवं जीवन-निर्वाहक प्रकृति की थी। किसान स्वतंत्र थे,…

कहानी आजाद भारत के सहकारिता आंदोलन की

दूसरी पंचवर्षीय योजना में भी सहकारिता क्षेत्र पर बल दिया गया। अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण समिति की सिफारिशों के आधार पर योजना ने सरकारी विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार…