लेखक के लेख

रामबहादुर राय

था वह ऐतिहासिक क्षण

अध्यक्ष के आसन पर बैठने की बारी अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद की थी। बधाई भाषण के क्रम में ‘भारत-कोकिला और बुलबुले हिन्द’ सरोजिनी नायडू का भाषण जैसे ही समाप्त हुआ…

मुस्लिम लीग की प्रेत बाधा

  मुस्लिम लीग की अनुपस्थिति संविधान सभा पर अंत तक छाई रही। इस तरह मानो संविधान सभा पर मुस्लिम लीग की प्रेत बाधा मंडरा रही हो। उससे चाहते हुए भी…

राजनीतिक भूकंप

  भारतीय लोकतंत्र अपनी यात्रा के नए पड़ाव पर है। यह नयापन आशाप्रद है। इसमें सकारात्मकता है। लेकिन एक समूह ऐसा भी है जो 17वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम की…

बदलाव का हर पीढ़ी को अधिकार

  संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी से संविधान सभा को वैधानिक और आत्मिक बल मिला।…

चेतावनी जो सही निकली

  संविधान सभा के पांचवें दिन पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव रखा। वे चाहते थे कि उसे संविधान सभा बिना बहस के पारित कर दे। वैसा हुआ…

एक रहस्य जो उजागर हुआ

  लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर संविधान सभा ने डा. भीमराव अंबेडकर का भाषण दत्तचित्त होकर सुना। इसकी पुष्टि अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद की एक टिप्पणी से होती है। जो संविधान…

आधुनिक जीवन का आधार राष्ट्रीयता है!

  संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के लक्ष्य संबंधी प्रस्ताव पर दूसरे चरण की बहस महीने भर बाद फिर से शुरू हुई। इस अवधि में मुस्लिम लीग की प्रतीक्षा…

नगालैंड के गांधी

  नगालैंड के गांधी नटवर ठक्कर नहीं रहे। गुवाहाटी के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वे उस पीढ़ी के थे जो भारत की एकता और अखंडता के लिए…

मतदाता किसी नकलची को स्वीकार नहीं करते

चुनावी राजनीति को पटरी पर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक देश-एक चुनाव' का विचार रखा। अगर ऐसा हो जाता है तो वह एक आदर्श स्थिति होगी। लेकिन…

अब तक वे संघ के मार्गदर्शक थे, अब देश के अभिभावक हो गए

मुहावरे की भाषा में ही इसे कहना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत दिल्ली आए। साफ मन और दिल से आए। सज-धजकर आए। चार दिन रहे। अपने कथन…

जनसत्ता के क्रमिक क्षय पर विचार करना एक दर्द भरा काम है

15 जनवरी, 2000 को विवेक गोयनका का सभी लोगों को पत्र मिला जिसमें वे समूह के सीईओ बनाए गए। वे इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक तो थे ही। यह नया…

प्रभाष जोशी ने सीईओ का पद ठुकराया, शेखर गुप्त ने सहर्ष स्वीकारा – इतिहास जनसत्ता का

क्षेत्रीय अख़बारों से आये लोगों ने प्रभाष जोशी की अंगुली पकड़कर जनसत्ता को बनाया। तब एक संरक्षक का भाव था। प्रभाष जोशी ने जब संपादकी छोड़ी तब जनसत्ता चार जगहों…