लेखक के लेख

शिवेन्द्र राणा

आवश्यक है आरक्षण की समीक्षा

 अब बात दलित एवं तथाकथित पिछड़ा वर्ग की. आज आरक्षण की उपयोगिता साबित करने के लिए तथाकथित सवर्णों क़ो कोसना अनुचित है. दुनिया का ऐसा कौन सा दंड विधान है…

धार्मिक स्थलों की मुक्ति का अर्थ

एवं धार्मिक स्थलों को अपवित्र और ध्वस्त करने के लिए प्रोत्साहित किया. मीर सैय्यद अली हमदानी इसी सिलसिले से सम्बंधित था. वही बंगाल में हिन्दुओं के इस्लाम में बलात् धर्मान्तरण…

सूफ़ीवाद का यथार्थ

ख्वान्द महमूद भारत आया एवं कश्मीर को अपना केंद्र बनाकर इस्लाम के प्रचार में लिप्त हो गया. इसके संबंध अकबर तथा जहांगीर से थे. बाद में शाहजहां के काल में…

 मानवाधिकार की सर्वभौमिकता का प्रश्न

सहमति प्रदान की. पुन: अक्टूबर, 1991 में मानवाधिकारों के संरक्षण और उनके लिए जागरूकता प्रसार हेतु आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 'पेरिस सिद्धांत' अंगीकृत किये गये जिनकी पुष्टि संयुक्त महासभा…

बिहार: जल एवं नदी प्रदूषण से आतंकित राज्य

  ठोस प्रदूषकों से युक्त जल का सेवन कई प्राणघातक रोगों को आमंत्रित करता है, जैसे पारा से मिनामाटा, एस्बेस्टस से एस्बेस्टोसिस, सीसा से एनीमिया, नाइट्रेट की अधिकता से ब्लू…

नायकत्व पर आधारित सामाजिक ध्रुवीकरण का कुत्सित प्रयास

  अन्यत्र, गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर ने गाँधीवादी रणनीति से प्रेरित स्वतंत्रता आंदोलन पद्धति की आलोचना की है. किंतु इससे यह अर्थ नहीं लगाया जा सकता कि वे साम्राज्यवादी सत्ता…

राजनीतिक वंशवाद की विषबेल

   फ्रैंक मोरिस ने 1960 में एक बार लिखा था, "ऐसा बिल्कुल ही नहीं लगता कि पंडित नेहरू परिवारवाद को आगे बढ़ाएंगे, यह उनके चरित्र और उनके पूरे करियर को…

भ्रष्टाचार एवं अकर्मन्यता के केंद्र बनते विश्वविद्यालय

  उदाहरणस्वरूप स्वनामधन्य मगध विश्वविद्यालय है, जहाँ किसी भी कोर्स की पढ़ाई पूरी करने में निर्धारित से दुगुना समय लगता है. कुछ दिनों पूर्व तीन साल से लंबित (Pending) परिणामों…

संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के असंतुलन से उपजा संघर्ष

 तात्पर्य यह है कि संविधान ना सिर्फ लोगों को अधिकार देता है बल्कि उसकी सुरक्षा भी करता हैं. हालांकि मूल अधिकारों के उपयोग में संयम की बड़ी आवश्यकता एवं समझ…

अशिष्ट-अमर्यादित राजनीतिक भाषा

इसमें मिडिया जगत विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मिडिया भी एक प्रमुख कारक है. प्रथम तो यह नेताओं की सुर्खियों में बने रहने भावना का लाभ उठाता है. वर्तमान में राजनीतिज्ञ होने का…

भोजपुरी: संवैधानिक सम्मान का संघर्ष

  देश में अगर किसी भाषा के संवैधानिक अधिकारों कि माँग सबसे सार्थक हैं तो वो भोजपुरी ही है. 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार झारखण्ड, बंगाल आदि…