लेखक के लेख

शिवेन्द्र राणा

लव जिहाद: सनातन समाज को स्वमूल्यांकन का आवश्यकता

  दूसरी बड़ी समस्या पश्चिमपरस्त मानसिकता का प्रसार-प्रचार है. यह सही है कि सनातन समाज बहुत हद तक ग्रहणशीलता रहा है. भारत में ब्रिटिश सत्ता प्रारंभ होने के साथ ही…

कांग्रेस के लिए आत्मावलोकन का समय

 पर्यावरणविद अनुपम मिश्र कहते हैं, 'अकाल अकेले नहीं आते. पहले अच्छे कामों का और अच्छे विचारों का अकाल आता है.' इस कथन के गहरे निहितार्थ हैं. यह उक्ति कांग्रेस की…

दल-बदल निरोधक क़ानून पर विमर्श की आवश्यकता

    दिनेश गोस्वामी समिति (1990), विधि आयोग के "चुनाव कानूनों में सुधार" की 170वीं रिपोर्ट (1999) के साथ ही संविधान समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग (NCRWC,2002) ने भी…

सनातन मंदिरों पर भेदभाव के आरोप के निहितार्थ

  वास्तव में सनातन समाज के उपासना स्थलों के संबंध में ऐसे कुत्सित धारणाओं एवं विवादों का प्रचार-प्रसार, अनर्गल आरोप, उसकी मिथ्या निंदा द्वारा सनातनियों को लांछित करने की एक अघोषित…

ईशनिंदा कानून की मांग के निहितार्थ

   एक प्रश्न देश के वामपंथी, गाँधीवादी, समाजवादी और उन सभी तथाकथित पंथनिरपेक्षता के अलम्बदारों से हैं जो आये दिन सनातन समाज में बढ़ रहे धार्मिक आग्रह पर लंबी चौड़ी…

सांप्रदायिकता के भंवर में समाजवाद

   समाजवाद अगर अपने सिद्धांतों के प्रति दृढ़ था तो उसे सांप्रदायिक एवं धार्मिक कट्टरपंथियों के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा हो जाना था. समाजवादी खड़े तो हुए, लेकिन चुनिंदा तरीके…