लेखक के लेख

रामबहादुर राय

वैदिक जी का जाना पत्रकारिता जगत की बड़ी क्षति

डा. वेद प्रताप वैदिक जी का जाना पत्रकारिता जगत की बड़ी क्षति है। वह प्रखर चिंतक, लेखक और सामाजिक सरोकारों वाले व्यक्ति थे। हमेशा वो किसी न किसी अभियान में…

18 फरवरी, 1946: नौसेना विद्रोह

विद्रोह मात्र एक जहाज पर ही नहीं हुआ। वहां से शुरू अवश्य हुआ। लेकिन देश के सभी बंदरगाहों पर खड़े जहाज उसमें शामिल हो गए। करांची से कलकत्ता तक खड़े…

तीन-तेरह में फंसा विपक्ष

विपक्षी एकता कोई नई बात नहीं है। पहले विपक्षी एकता का आधार वैचारिक होता था अब यह स्‍वार्थ आधारित हो गया है। लेकिन यह विडंबना ही है कि इन दिनों…

राजनीतिज्ञ गांधी

महात्मा गांधी एक पहेली बना दिए गए हैं। इस कारण उन्हें जानने के लिए कई गुत्थियों को सुलझाना जरूरी हो जाता है। संभवत: यही समझकर अलबर्ट आइंस्टीन ने सच ही…

इंडियन एक्सप्रेस के दो लेख

इंडियन एक्सप्रेस के लिज मैथ्यू और घनश्याम तिवारी ने 10 अगस्‍त को अलग-अलग विषय पर लेख लिखा है। दोनों पत्रकारों को अच्‍छा लेख लिखने के लिए संविधान के मर्मज्ञ फाली…

कांग्रेस से एक राजनीतिक देवदूत का जाना

गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में एक राजनीतिक देवदूत थे। कांग्रेस से एक राजनीतिक देवदूत का जाना कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। कांग्रेस से नाता तोड़कर उनका नई राह…

‘मधुशाला’ के मनीष

अन्ना आंदोलन तक भ्रष्टाचार से मुक्ति के आंदोलनों की एक श्रृंखला है। अफसोस की बात है कि इन आंदोलनों से जो निकले उनमें कई लालू प्रसाद हैं। लालू प्रसाद एक…

सोनिया गांधी की कमजोर डोर – रामबहादुर राय

जो हथकंडा इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने घोटाले की जांच से बचने के लिए अपनाया था, वही हथकंडा नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी अपना रही हैं। इंदिरा गांधी…