लेखक के लेख

रामबहादुर राय

इमरजेंसी को याद करना उथल-पुथल की उस परिस्थिति में लौटने जैसा है

सत्ता से चिपके रहने की यह उनकी लालसा थी। वह परिस्थिति कैसे पैदा हुई? इसे समझने के लिए उस दौर की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं को गौर से देखना चाहिए। इंदिरा…

पटेल का प्रधानमंत्री न बनना

यह तो कहीं-कहीं छपा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि पटेल जयंती आयोजित करने वाला मैं कौन होता हूं।’ लेकिन यह…

संविधान को जाने – 2

इसका एक परिणाम यह हुआ कि यूरोप में उभरी अनेक विचारधाओं की छाया स्वाधीनता आंदोलन पर वैचारिक रूप में पड़ी। साम्यवाद, नानारूप में समाजवाद और पूंजीवाद उसी वैचारिक प्रवाह से…

विचार में शक्ति संकल्प से आती है, वैसा ही है आजादी के अमृत महोत्सव का संकल्प

विचार में शक्ति संकल्प से आती है। आजादी के अमृत महोत्सव का संकल्प वैसा ही है, जैसा महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह का था। वह पराधीनता से पूरी मुक्ति का…

नेहरू की जुबानी

संविधानवाद के उतार-चढ़ाव में 1935 मील का पत्थर है। उससे जो हमारी संवैधानिक यात्रा शुरू हुई  वह इतिहास के अगर-मगर से भरी पड़ी है। स्वतंत्र भारत के निर्माताओं से कहां…

भारत विभाजन की नींव

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि 1937 के विधानसभा चुनाव में क्या कांग्रेस और मुस्लिम लीग का दृष्टिकोण भिन्न था? अगर भिन्न था तो उसका सार क्या था? यह समझने…

संविधान सभा की भूल भुलैया

अपना संविधान बनाने की धुन में डूबे रहने के कारण क्या कांग्रेस नेतृत्व ने भारत विभाजन के खतरे को नहीं समझा? 1935 के ब्रिटिश संविधान के लागू होने के बाद…

बदलाव का हर पीढ़ी को अधिकार – रामबहादुर राय

संविधान के लक्ष्य का प्रस्ताव ‘सभी सदस्यों ने खड़े होकर स्वीकार किया।’ यह 22 जनवरी, 1947 की ऐतिहासिक घटना है। उसी से संविधान सभा को वैधानिक और आत्मिक बल मिला। संविधान…