आपातकाल एवं संपूर्ण क्रांति: इतिहास से सबक
कार्ल आर. पापर ने अपने लेख 'द पावर्टी ऑफ हिस्टारिसीज्म' में लिखा है, इतिहास का कोई अर्थ नहीं होता, क्योंकि इतिहास का कोई लक्ष्य नहीं है. पापर के इस कथन…
समाचार से आगे, समझ की ओर।
कार्ल आर. पापर ने अपने लेख 'द पावर्टी ऑफ हिस्टारिसीज्म' में लिखा है, इतिहास का कोई अर्थ नहीं होता, क्योंकि इतिहास का कोई लक्ष्य नहीं है. पापर के इस कथन…
भारत में जनसमर्थित आंदोलनों की पृष्ठभूमि बमुश्किल एक सदी पुरानी है. 20वीं सदी के पूर्वांर्ध में देश ने आधुनिक प्रकार के जानांदोलन एवं जनविद्रोह की आयोजना को देखा-समझा. फिर सत्ता…
भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह एक अपराध है.जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति द्वारा सांकेतिक, वाचन, लेखन अथवा किसी अन्य माध्यम से संवैधानिक सरकार के विरुद्ध विद्रोह…
देश के प्रतिष्ठित पत्रकार एवं आपातकाल सेनानी श्री रामबहादुर राय की ख्याति एक राजनीतिक विश्लेषक एवं खोजी पत्रकार की रही है किंतु अब उनका व्यक्तित्व एक संविधानविद् में परिवर्तित हो रहा…
इस मामले में आंध्र प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने भी इसका विरोध जताते हुए बिहार सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की. वही उमा कृष्णैया ने राष्ट्रपति एवं…
मतदान से सम्बंधित मतदाताओं में उत्पन्न भ्रम के निवारण हेतु एक पुख्ता उपाय करते हुए चुनाव आयोग ने 1 मई, 2015 के बाद होने वाले किसी भी प्रकार के चुनाव…
इंसानी कुकृत्य से व्याप्त प्रदूषण का दंश सिर्फ धरती ही नहीं बल्कि महासागर भी भुगत रहे हैं. महासागर प्रकृति-चक्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. जीवों के श्वसन के लिए जितनी ऑक्सीजन…